उज्जैन : उज्जैन में 17 से 19 सितंबर तक “युवा धर्म संसद” का आयोजन होगा। आयोजकों के मुताबिक, देवास रोड स्थित गीता भवन में तीन दिवसीय कार्यक्रम में 24-25 राज्यों से करीब 1700 छात्र-छात्राएं जुटेंगे। इनके अलावा करीब 300 शिक्षक, शोधकर्ता और धर्माचार्य भी अलग-अलग सत्रों में हिस्सा लेंगे।
18 सितंबर को उद्घाटन सत्र में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत शामिल होंगे, जबकि 19 सितंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समापन समारोह में शामिल होंगे।
बुधवार को देश के अलग-अलग शहरों से पहुंचे युवा कलाकार परिसर में चित्रकला प्रदर्शनी के लिए पेंटिंग तैयार करते नजर आए। आयोजन स्थल पर ही इन पेंटिंग्स को प्रदर्शित किया जाएगा।
सबसे पहले गीता भवन में क्या तैयारी
बुधवार को गीता भवन में तैयारियों के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे युवा कलाकार प्रदर्शनी के लिए पेंटिंग बनाने में जुटे रहे। प्रदर्शनी की थीम भारत-भाव रखी गई है। कार्यक्रम के दौरान पुस्तक मेले का भी आयोजन होगा, जिसमें आयोजकों के अनुसार देश के करीब 50 प्रमुख प्रकाशन समूह शामिल होंगे।
आयोजन स्थल पर आने वाले प्रतिभागियों के लिए अलग-अलग सत्रों और गतिविधियों की व्यवस्था की जा रही है। तीन दिनों के कार्यक्रम में धर्म, शिक्षा, संस्कृति, आस्था, कृषि और तकनीक जैसे विषयों को शामिल किया गया है।
25 राज्यों से पहुंचे 1700 रजिस्ट्रेशन
सेवाज्ञ संस्थानम् के सह मीडिया प्रमुख बादल सिंह के मुताबिक, इस बार करीब 1700 प्रतिभागियों के रजिस्ट्रेशन हुए हैं। इनमें देश के 24 से 25 राज्यों के युवा शामिल हैं। आयोजकों ने जुलाई में रजिस्ट्रेशन शुरू किए थे, जिन्हें 31 अगस्त को बंद कर दिया गया।
बादल सिंह के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन बंद होने के बाद भी लगातार लोगों के फोन आ रहे हैं, लेकिन आयोजन स्थल की क्षमता के कारण इससे ज्यादा प्रतिभागियों को शामिल करना संभव नहीं है।
आयोजकों का कहना है कि युवा धर्म संसद की शुरुआत 2018 में हुई थी। इससे पहले इसके आयोजन काशी, अयोध्या, हरिद्वार, मथुरा और कांचीपुरम में हो चुके हैं। आयोजकों के अनुसार, पिछली पांच धर्म संसदों में करीब 7100 प्रतिभागी शामिल हो चुके हैं।
शिकागो भाषण की स्मृति से जुड़ा आयोजन
आयोजकों के अनुसार, युवा धर्म संसद का मूल विचार स्वामी विवेकानंद के शिकागो उद्बोधन की स्मृति से जुड़ा है। इसका उद्देश्य युवाओं के बीच धर्म की अवधारणा, भारतीय संस्कार और सनातन संस्कृति से जुड़े विषयों पर संवाद के लिए मंच उपलब्ध कराना है। इस बार आयोजन सिद्धपीठ हनुमत निवास, अयोध्या के पीठाधीश्वर एवं संरक्षक आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरणजी महाराज के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

