वॉशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने गुरुवार को 8 बड़ी आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। इनमें भारत की चार कंपनियां टाटा, इंफोसिस, विप्रो और HCL हैं। इनके अलावा माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी पर भी यह रोक लगाई गई है।
इस फैसले के बाद ये कंपनियां अब अपने कर्मचारियों के लिए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन PERM का आवेदन नहीं कर सकेंगी। इसी प्रक्रिया के जरिए कंपनियां H-1B वीजा पर काम कर रहे विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में पक्के तौर पर बसाने के लिए अर्जी लगाती हैं।
अमेरिकी सरकार का कहना है कि वे स्थानीय अमेरिकियों की नौकरियां छीनकर विदेशी कर्मचारियों को नहीं दे सकते। इस फैसले से इन कंपनियों के जरिए अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने का इंतजार कर रहे हजारों भारतीय कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया अटक सकती है।
अमेरिकी श्रम विभाग ने इन कंपनियों को PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रक्रिया से सस्पेंड किया है। अब इन कंपनियों के नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। जो आवेदन पहले से चल रहे हैं, उनकी प्रक्रिया भी रोक दी गई है।
PERM क्या होता है?
प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट एक तरह का सरकारी अप्रूवल है। ये किसी भी अमेरिकी कंपनी को किसी विदेशी कर्मचारी को हमेशा के लिए नौकरी पर रखने यानी ग्रीन कार्ड से पहले अमेरिका के श्रम विभाग से लेना पड़ता है।
कंपनी को सरकार को यह भरोसा दिलाना होता है कि:
- इस नौकरी के लिए उन्हें कोई योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिला।
- इस विदेशी कर्मचारी को रखने से स्थानीय अमेरिकी लोगों की नौकरियां नहीं छिन रही हैं और न ही उनकी सैलरी पर कोई बुरा असर पड़ रहा है।
भारतीय आईटी कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा?
जिन कर्मचारियों का ग्रीन कार्ड का काम अभी PERM स्तर पर शुरू नहीं हुआ है, उनकी प्रक्रिया वहीं थम जाएगी। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को ग्रीन कार्ड की लाइन में अपनी जगह नहीं मिलेगी, जिससे उनका अमेरिका में पक्के तौर पर बसने का इंतजार लंबा हो जाएगा।
अमेरिका में ग्रीन कार्ड मिलना पहले से ही बहुत मुश्किल और लंबा काम है।
- 12 से 15 साल पुरानी वेटिंग लिस्ट: अगर आप अनुभवी प्रोफेशनल्स की कैटेगरी (EB-2 या EB-3) में आते हैं, तो अमेरिका में अभी उन भारतीयों को ग्रीन कार्ड मिल रहा है जिन्होंने 2012 या 2014 में अप्लाई किया था।
- कोटा खत्म: सितंबर 2026 की सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल के लिए भारतीयों का कोटा खत्म हो चुका है, इसलिए नई मंजूरियों पर फिलहाल रोक है।
- PERM सस्पेंशन का असर: इस नई रोक की वजह से भारतीय कर्मचारी अब ग्रीन कार्ड की इस लंबी लाइन में खड़े ही नहीं हो पाएंगे। जब वे लाइन में लग ही नहीं पाएंगे, तो उनका इंतजार जो पहले से 10-15 साल का था, वो और भी कई साल आगे खिसक जाएगा।

