केंद्र सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता 3% बढ़ा दिया है। मंगलवार 28 अक्टूबर को हुई कैबिनेट मीटिंग में DA बढ़ोतरी पर फैसला हुआ।
8वें वेतन आयोग के लागू होने से पहले इस बढ़ोतरी से महंगाई भत्ता 60% से बढ़कर 63% हो जाएगा। इससे लगभग 48 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा। नई दरें 1 जुलाई से प्रभावी मानी जाएंगी।
अप्रैल में 2% बढ़ा था DA, अब 60% से बढ़कर 63% हुआ
इससे पहले सरकार ने अप्रैल महीने में कर्मचारियों के डीए और पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत (DR) में 2 फीसदी का इजाफा किया था। उस बढ़ोतरी के साथ डीए की दर 60% पर पहुंच गई थी। अब 3 फीसदी की ताजा बढ़ोतरी के बाद यह आंकड़ा 63 फीसदी हो गया है। सरकार के इस फैसले से त्योहारों के सीजन में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सीधा आर्थिक फायदा मिलेगा और पिछले महीनों का एरियर भी खाते में आएगा।
कर्मचारियों की सैलरी पर कितना असर पड़ेगा
डीए बढ़ने से सैलरी में सीधी बढ़ोतरी बेसिक पे के आधार पर तय होती है
- मिनिमम बेसिक सैलरी वालों के लिए: अगर किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹18,000 है, तो 3% की बढ़ोतरी के हिसाब से हर महीने ₹540 का इजाफा होगा।
- हायर पे-स्केल वालों के लिए: अगर किसी वरिष्ठ अधिकारी की बेसिक सैलरी ₹56,100 है, तो उनकी मासिक सैलरी में लगभग ₹1,683 की सीधी बढ़ोतरी होगी।
- एरियर का भुगतान: चूंकि यह फैसला जुलाई से प्रभावी है, इसलिए कर्मचारियों को जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने का बकाया (Arrears) भी आगामी सैलरी के साथ दिया जाएगा।
साल में दो बार रिवाइज होता है भत्ता
केंद्र सरकार हर साल कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए डीए और डीआर में दो बार संशोधन करती है। पहला संशोधन आमतौर पर जनवरी से और दूसरा जुलाई से प्रभावी होता है। यह ताजा घोषणा जुलाई की छमाही के लिए की गई है। सरकार ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) के आंकड़ों के आधार पर महंगाई का आकलन करती है और उसी अनुपात में भत्ते बढ़ाने का निर्णय लेती है।
बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए मिलता है अलाउंस
डियरनेस अलाउंस (DA) यानी महंगाई भत्ता, सरकारी कर्मचारियों के रहन-सहन के खर्च को संतुलित करने के लिए दिया जाने वाला अलाउंस है। यह कर्मचारी की बेसिक सैलरी के प्रतिशत के रूप में तय होता है।
वहीं, डियरनेस रिलीफ (DR) ठीक इसी तरह का फायदा होता है जो रिटायर्ड कर्मचारियों यानी पेंशनर्स को उनकी बेसिक पेंशन पर दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा की चीजों के बढ़ते दामों के असर को कम करना है।

