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Wed. Mar 4th, 2026

ज्योति मौर्या प्रकरण: मनीष दुबे पर कार्रवाई को लेकर दुविधा में शासन

लखनऊ : पीसीएस ज्योति मौर्या प्रकरण में महोबा में तैनात होमगार्ड कमांडेंट मनीष दुबे के खिलाफ सौंपी गई जांच रिपोर्ट का शासन में परीक्षण हो रहा है। इस परीक्षण में तमाम खामियां सामने आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक खामियों और उससे उपजी दुविधा की वजह से कमांडेंट पर कार्रवाई को लेकर निर्णय नहीं हो पा रहा है। शासन के परीक्षण में जांच रिपोर्ट की खामियों को लेकर विधिक राय लेने की तैयारी है। हालांकि इस प्रकरण से विभाग की छवि धूमिल होने के आधार पर कमांडेंट पर कार्रवाई की जा सकती है।

महिला अधिकारी से करीबी रिश्तों व उसके पति की हत्या के षड्यंत्र समेत अन्य तथ्यों की जांच की गई थी। डीआइजी होमगार्ड, प्रयागराज रेंज की रिपोर्ट में दोषी पाए गए कमांडेंट के विरुद्ध होमगार्ड मुख्यालय से निलंबन व विभागीय कार्यवाही की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। महिला अधिकारी के पति की हत्या के षड्यंत्र के मामले में एफआइआर दर्ज कर जांच किए जाने की बात भी कही गई थी।

हालांकि जांच रिपोर्ट में इसे लेकर कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं दिया गया। जो साक्ष्य दिए गए हैं, उनका फारेंसिक परीक्षण कराए जाने के बिना ही किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि कमांडेंट की पत्नी द्वारा लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों को लेकर भी तस्वीर पूरी तरह से साफ नहीं है। कमांडेंट व उनके पत्नी के बीच विवाद को लेकर कोर्ट में तलाक का वाद दायर है। वहीं महिला पीसीएस अधिकारी का भी अपने पति से विवाद है। फिलहाल शासन स्तर पर अभी कोई निर्णय नहीं हो सका है।

दरअसल डीआईजी होमगार्ड प्रयागराज रेंज संतोष कुमार ने होमगार्ड कमांडेंट मनीष दुबे के खिलाफ जांच कर उनको निलंबित करने, विभागीय कार्यवाही शुरू करने और मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश की थी। उनकी रिपोर्ट को डीजी होमगार्ड ने शासन को भेज दिया था। रिपोर्ट के प्रारंभिक परीक्षण में सामने आया है पीसीएस ज्योति मौर्या के पति आलोक मौर्या को जान से मारने की साजिश रचने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण का उल्लेख जांच रिपोर्ट में नहीं दिया गया है।

मनीष दुबे की पत्नी का भी मामला

दो वर्ष पहले मनीष दुबे से विवाह करने वाली लखनऊ की युवती ने डीआईजी को दिए अपने बयान में दहेज मांगने का आरोप लगाया है। अधिकारियों के मुताबिक विवाह के एक माह बाद ही अदालत में तलाक का मुकदमा दायर कर दिया गया था। लिहाजा, दहेज मांगने के आरोप का अब संज्ञान लेना विधिक रूप से उचित नहीं है।

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