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Sat. Feb 14th, 2026

फार्मेसी के छात्रों ने जाने मोलसॉफ्ट से दवा तैयार करने के गुर

  • जीएलए फार्मेसी विभाग आयोजित हुई दो दिवसीय कार्यशाला में विद्यार्थियों से रूबरू हुए फार्मेसी विशेषज्ञ

दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के फार्मेसी विभाग में मोलसॉफ्ट एलएलसी के साथ अकेडमिक पार्टनरशिप में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने मोल सॉफ्टवेयर के माध्यम से दवाओं को प्रयोगशाला में बनाने से पहले कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग के जरिये उनके औषधीय गुण परखने के बारे में जानकारी ली। कार्यक्रम में कई संस्थानों के विद्यार्थियों ने भाग लिया।

‘हैण्ड्स ऑन ट्रेनिंग वर्कशॉप ऑन मोलीकुलर डॉकिंग एंड मोलीकुलर डायनामिक्स सिमुलेशन‘ विषय पर आयोजित कार्यशाला में विद्यार्थियों को दवाओं के नवनिर्माण के लिए अनुसंधान प्रयोगशालाओं में उपयोग में लाये जाने वाले सॉफ्टवेयर के संबंध में जानकारी प्रदान की। पहले दिन मुख्य अतिथि यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली के सेंटर फॉर बायोमेड़िकल रिसर्च विभाग की प्रोफेसर मधु चोपड़ा ने कहा कि कई बिमारियां व्यक्ति इस प्रकार जकड़ लेती हैं कि संबंधित दवाओं से उक्त बीमारी कोई फर्क नहीं पड़ता। आज जरूरत है तो ऐसी दवाओं के नवनिर्माण की जो बीमारी पर असरदार हो। औशधी अनुसंधान प्रयोगशालाओं में मोलसॉफ्ट बहुत मदद करने में कारगर साबित हो सकता है।

आईआईटी दिल्ली से डा. तारक करमाकर ने विद्यार्थियों से फार्मा क्षेत्र में हो रहे अनुसंधान एवं चुनौतियों के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने छात्रों को बताया कि फार्मा उद्योग नित नये अनुसंधान करने की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहा है। आज हम भारत में प्रयोग की जाने वाली अधिकांश दवाइयों का उत्पादन स्वंय कर रहे हैं तथा विदेशों को भी निर्यात कर रहे हैं। उन्होंने छात्रों को फार्मा कंपनी के विभिन्न विभागों में रोजगार के अवसरों की भी जानकारी दी।

दूसरे दिन मोल सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी देते हुए मोलसॉफ्ट एलएलसी कंपनी से डा. मोहसिन खान पठान एवं अमित वेदी ने बताया कि मोलसॉफ्ट के माध्यम से वैज्ञानिक उन्हीं दवाओं को प्रयोगषाला में बनाते हैं, जिनमें फार्माकोलाजिकल एक्टिविटी पायी जाती है। इस प्रकार वैज्ञानिक व्यर्थ के कैमिकल्स बनाने में लगने वाले समय और खर्चे को बचा पाते हैं। डॉ. पठान ने विद्यार्थियों को मोलसॉफ्ट पर ट्रेनिंग भी दी और उसकी बारीकियों को समझाया।

जीएलए फार्मेसी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सुमन सिन्हा ने अपने व्याख्यान में छात्रों को ड्रग डिजाईन के प्रयोग में लायी जाने वाली सॉफ्टवेयर की जानकारी दी और उनको कम्प्यूटर स्क्रीन के माध्यम से दिखाया कि कैसे प्रोटीन और ड्रग आपस में जुड़ते हैं और कैसे उनकी बाइडिंग एनर्जी की गणना की जाती है।

प्रो. मीनाक्षी वाजपेयी ने कार्यशाला में आये सभी अतिथियों का स्वागत किया और उनको दो दिवसीय कार्यशाला के विषय में बताया। फार्मेसी के निदेशक प्रो. अरोकिया बाबू ने कंपनी द्वारा दिए गये सहयोग की सराहना की, जिसके माध्यम से सभी छात्रों ने सॉफ्टवेयर पर दवाओं और हमारे शरीर की प्रोटीन के बीच में होने वाले इंटरेक्षन से औषधि अनुसंधान में उसका उपयोग समझ पाये। डा. योगेश मूर्ति ने अपने धन्यवाद ज्ञापन में बताया कि इस कार्यशाला में सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी पंजाब, पंजाब यूनिवर्सिटी पटियाला, वेंकटेश्वरा ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूट पांडुचेरी, एसजीटी यूनिवर्सिटी गुरूग्राम, नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी नोएडा, डा. केएन मोदी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी मोदीनगर, रमेश इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एंड टेक्नीकल एजुकेशन ग्रेटर नोएडा, जेएसएस एकेडमी नोएडा, फार्मेसी इंस्टीट्यूट ऑफ एनआइईटी ग्रेटर नोएडा, इंटेग्रल यूनिवर्सिटी लखनऊ, बीबीडीआइटी कॉलेज ऑफ फार्मेसी गाजियाबाद, आगरा पब्लिक फार्मेसी कॉलेज आगारा, राजीव एकेडमी ऑफ फार्मेसी के विद्यार्थियों ने भी प्रतिभाग किया।

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