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14 अक्टूबर को सूर्य और 28 को लगेगा चंद्र ग्रहण, जानें कहां होगा ग्रहण का प्रभाव और किस राशि पर दिखेगा असर

दैनिक उजाला, मथुरा : ज्योतिष के अनुसार अक्टूबर माह बहुत खास है। इस माह में पंद्रह दिन के अंतराल से सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों लग रहे हैं। सूर्यग्रहण 14 अक्टूबर शनिवार के दिन सर्व पितृअमावस्या के दिन लगेगा। इसके पंद्रह दिन बाद 28 अक्टूबर की रात चंद्र ग्रहण लगेगा। यह जानकारी देते हुए श्री बलभद्र पीठाधीश्वर आचार्य विष्णु महाराज ने बताया कि सूर्यग्रहण 14 अक्टूबर की रात 6 बजकर 40 मिनट से 15 अक्टूबर को रात्रि 1 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। साल का अंतिम खंडग्रास चंद्र ग्रहण 28 अक्टूबर शनिवार का होगा।

14 अक्टूबर को अमावस्या पर सूर्यग्रहण होगा। लेकिन इस ग्रहण का भारत में प्रभाव नहीं होगा। बलभद्र पीठाधीश्वर आचार्य विष्णु महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय समय के अनुसार रात्रि 06:40 बजे इस ग्रहण का प्रारंभ होगा तथा यह ग्रहण 15 अक्तूबर को प्रात 01:19 बजे समाप्त होगा। भौगोलिक स्थिति के अनुसार यह कंकण सूर्य ग्रहण अमेरिका, मैक्सिको, ब्राज़ील, कोलंबिया आदि देशों में दिखाई देगा।
यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। इससे भारत में ग्रहण से सम्बंधित वेध, सूतक, स्नान, दान-पुण्य, कर्म, यम-नियम मान्य नहीं होंगे।

साल का अंतिम खंडग्रास चंद्र ग्रहण 28 अक्टूबर शनिवार का होगा

भारतीय समय से विरल छाया प्रवेश रात्रि 11:32 बजे ग्रहण का स्पर्श रात्रि 1:05बजे, मध्य रात्रि 1: 44 बजे, मोक्ष रात्रि 2 :23 बजे, विरल छाया निर्गम रात्रि 3:56 बजे होगा। इसका सूतक भारतीय समय से दिन में शाम 4:05 बजे से प्रारम्भ होगा।
सूतक काल में मंदिर में नहीं जाया जाता और भगवान को स्पर्श नहीं किया जाता है। सूतक काल शुरू होते ही पूजा पाठ बंद कर दिए जाते हैं। मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं। यह ग्रहण उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका का पश्चिमी भाग को छोकर सम्पूर्ण विश्व में दृश्य होगा। जहां ग्रहण दृश्य होगा उन्हीं स्थानों पर ग्रहण से सम्बंधित वेध, सूतक, स्नान, दान-पुण्य, कर्म, यम, नियम मान्य होंगे।

विविध राशियों पर ग्रहण का शुभाशुभ प्रभाव

अशुभ→मेष, वृषभ, कन्या, मकर

शुभ→मिथुन, कर्क, वृश्चिक, कुंभ सामान्य→सिंह, तुला, धनु, मीन

इस ग्रहण से भारत के कई राज्यों में व इंगलैंड, डेनमार्क, श्रीलंका, सीरिया, नेपाल, पोलैंड, फिलिपींस व पूर्वी प्रान्त में रोग हो, पशुओं में बीमारी हो, झगड़ें हों, प्रत्येक प्रकार के अन्न में मंदी, तूफान, अच्छी वर्षा, सरसों, अलसी, गुड़, शक्कर, सोना, चांदी, शेयर, घी, रुई, मसूर, खांड, वेजिटेबल, रसदार पदार्थ, सूत में तेजी हो। यह ग्रहण अश्विनी नक्षत्र एवं मेष राशि पर हो रहा है। इससे इस नक्षत्र एवं राशि वालों को रोग, कष्ट, पीड़ा आदि फल हो। जिन राशियों वालों को ग्रहण अशुभ फल कारक है उन को ग्रहण का दर्शन करना उपयुक्त नहीं हैं।

श्री बलभद्र पीठाधीश्वर आचार्य विष्णु महाराज

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