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जीएलए में आयोजित हुआ ‘एनसीबीटीए’ सम्मेलन, जुटे अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ

  • जीएलए के रसायन विभाग में आयोजित सम्मेलन में रासायनिक और जैव विज्ञान के विकास पर जोर

दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा रसायन विज्ञान विभाग द्वारा जादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता, पिट्सबर्ग स्टेट यूनिवर्सिटी यूएसए और झूलुलैंड विश्वविद्यालय दक्षिण अफ्रीका के सहयोग से “रासायनिक, जैविक और उपचारात्मक विभाजन के लिए नैनोआर्किटेक्चर्स“ एनसीबीटीए 23 पर तीसरा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में विद्युत रासायनिक और जैविक विज्ञान के विकास पर जोर दिया गया।

द अमेरिकन सिरेमिक सोसाइटी (एसीआरएस) के निदेशक एवं इंस्टीट्यूट ऑफ इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री, यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोन जर्मनी के अध्यक्ष मुख्य अतिथि प्रो. संजय माथुर तथा विशिष्ट अतिथि ओएनजीसी लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक आदेश कुमार दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन आर एंड डी प्रो. राज किशोर शर्मा, कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस कंपनी के निदेशक (आरएंडडी) डॉ. वेंकटेश्वरलू मन्ने ने कहा कि इस सम्मेलन का विषय कार्बनिक और अकार्बनिक नैनो-सामग्री डिजाइनिंग से संबंधित है, जो कि रासायनिक, विद्युत रासायनिक और जैविक विज्ञान के विकास का रास्ता खोलता है। समाज को हरा-भरा बनाने में सहयोग करना। नैनो, रसायन विज्ञान विज्ञान और इंजीनियरिंग का उपयोग करने का एक जिम्मेदार तरीका है जो कि रसायन विज्ञान की धारणा को सुधारने का प्रयास करता है।

इस सम्मेलन ने शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, विद्वानों और छात्रों के लिए नैनो सामग्री के क्षेत्र में नई अवधारणाओं और रासायनिक, विद्युत रासायनिक, जैविक और चिकित्सीय सहित उनके विभिन्न अनुप्रयोगों के बारे में अधिक जानने के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया। इसने नवीनतम के गुणात्मक और मात्रात्मक प्रदर्शन मूल्यांकन के साथ-साथ इन अनुसंधान क्षेत्रों में भविष्य की प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

सम्मेलन के कॉर्डिनेटर डा. विवेक शर्मा एवं डा. अनुज कुमार ने बताया कि एनसीबीटीए-23 में चयनित और प्रस्तुत किए गए पेपर स्कोपस इंडेक्स्ड और ईएससीआई जर्नल्स में प्रकाशित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि रसायन विज्ञान विभाग ने और अधिक सुधारों के साथ 22-24 नवंबर 2024 को आयोजित होने वाले चौथी एनसीबीटीए सम्मेलन की घोषणा भी की है।
विभागाध्यक्ष प्रो. दीपक दास ने बताया कि जाने-माने शिक्षाविदों, संकाय सदस्यों और देश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिष्ठित तकनीकी और शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों, उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ विदेशी प्रतिनिधियों के साथ करीब 170 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रो. राजकिशोर शर्मा, पिट्सबर्ग स्टेट यूनिवर्सिटी यूएसए से प्रोफेसर राम गुप्ता, चुलालोंगकोर्न विश्वविद्यालय बैंकॉक से प्रो. सूराथेप खेवहोम, आईआईटी खरगपुर के पूर्व प्रोफेसर पी. प्रमाणिक, जादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता से राजीब बंद्योपाध्याय, प्रो. परिमल कर्मकार, प्रो. पलटू कुमार ढाल, जुलुलैंड विश्वविद्यालय से प्रो. वीएसआर राजशेखर पुल्भोतला, आईपीसी पीएएस पोलैंड से डॉ. शशांक सुंदरियाल, एनपीएल नई दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुनील सिंह कुशवाहा आदि ने अपनी जानकारीपूर्ण और ज्ञानवर्धक प्रस्तुति से प्रतिभागियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कुल मिलाकर 12 पोस्टर प्रस्तुतियों के साथ-साथ 63 मौखिक प्रस्तुतियां हुईं।

जीएलए के कुलपति प्रो. फाल्गुनी गुप्ता, जादवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरंजन दास, प्रतिकुलपति डॉ. प्रदीप कुमार घोष, जीएलए के प्रतिकुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता, कुलसचिव अशोक कुमार सिंह, यूनिवर्सिटी ऑफ झुलुलैंड साउथ अफ्रीका के कुलपति प्रो. जोलिस्वा मटोस, साउथ अफ्रीका ने इस विशाल सम्मेलन की तारीफ में कशीदे गढ़े। सभी ने एक स्वर में ऐसे सम्मेलनों को देश के विकास और प्रगति में सहायक बताया।

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