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जीएलए प्रोफेसर का आधुनिक सुझाव ‘वोमिटिंग पाउच’ का पेटेंट प्रकाशित

दैनिक उजाला, मथुरा: स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक स्वच्छता के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए जीएलए यूनिवर्सिटी, मथुरा के फार्मेसी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. योगेश मूर्ति तथा यूनिवर्सिटी के अलुमनस डॉ. कृष्ण कुमार अग्रवाल द्वारा विकसित एक आधुनिक “वोमिटिंग पाउच” के सुझाव को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा प्रकाशित किया गया है। यह अत्याधुनिक तकनीक उल्टी जैसे बायोलॉजिकल फ्लुइड्स के संपर्क में आते ही उन्हें तुरंत ठोस रूप में परिवर्तित कर देती है, जिससे संक्रमण फैलने, रिसाव होने और दुर्गंध फैलने की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है।

यह आविष्कार चिकित्सा जगत, आपातकालीन सेवाओं, सार्वजनिक परिवहन और लंबी यात्राओं के दौरान स्वच्छता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शोधकर्ताओं के अनुसार, वर्तमान समय में अस्पतालों, एम्बुलेंस सेवाओं, रेल व हवाई यात्राओं में मरीजों अथवा यात्रियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले सामान्य वॉमिट बैग्स से रिसाव और दुर्गंध की समस्या बनी रहती है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए इस विशेष “वोमिटिंग पाउच” को विकसित किया गया है।

पाउच में उपयोग किए गए सुपर-एब्जॉर्बेंट पॉलिमर्स और विशेष जेलिंग एजेंट्स तरल पदार्थ को कुछ ही क्षणों में स्थिर जेल या ठोस रूप में बदल देते हैं। इससे उल्टी बाहर नहीं फैलती और आसपास का वातावरण सुरक्षित एवं स्वच्छ बना रहता है। साथ ही इसमें विशेष ऑडर-एब्जॉर्बिंग लेयर दी गई है, जो दुर्गंध को नियंत्रित करने में प्रभावी साबित होती है।

इस तकनीक की एक और खासियत इसका उपयोगकर्ता-अनुकूल डिजाइन है। पाउच को एर्गोनॉमिक माउथ ओपनिंग और री-सीलेबल क्लोजर के साथ तैयार किया गया है, ताकि उपयोग के बाद इसे सुरक्षित तरीके से बंद कर आसानी से निस्तारित किया जा सके। इससे स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों और आम यात्रियों को संक्रमण के खतरे से अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है।

फार्मेसी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. योगेश मूर्ति ने कहा कि इस शोध का मुख्य उद्देश्य केवल एक उत्पाद तैयार करना नहीं, बल्कि संक्रमण नियंत्रण और स्वच्छता को अधिक प्रभावी बनाना है। वहीं जीएलए के अलुमनस आरबीएस, आगरा में फैकल्टी ऑफ फार्मेसी डॉ. कृष्ण कुमार अग्रवाल ने बताया कि यह तकनीक भविष्य में हेल्थकेयर सेक्टर के लिए एक उपयोगी और व्यावहारिक समाधान साबित हो सकती है। स्वच्छता, सुरक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में यह उपलब्धि जीएलए यूनिवर्सिटी के शोध एवं नवाचार आधारित शैक्षणिक वातावरण को भी नई पहचान दिला रही है।

फार्मेसी विभाग के डायरेक्टर डॉ. कमल शाह ने इस उपलब्धि को स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक स्वच्छता के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में रिसर्च केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका सीधा लाभ समाज और आमजन को मिलना चाहिए। यह आधुनिक “वोमिटिंग पाउच” संक्रमण नियंत्रण, मरीजों की सुरक्षा और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में प्रभावी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि जीएलए का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को ऐसी तकनीकों के विकास के लिए प्रेरित करना है, जो समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान बन सकें।

वहीं डीन रिसर्च डॉ. कमल शर्मा ने कहा कि यह शोध विश्वविद्यालय की नवाचार आधारित शोध संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा और हेल्थकेयर सेक्टर में इस तरह की उपयोगी तकनीकों की आज वैश्विक स्तर पर आवश्यकता महसूस की जा रही है। यह आविष्कार न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुरक्षित बनाएगा, बल्कि सार्वजनिक स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण के क्षेत्र में भी नई दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने शोधकर्ताओं को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि जीएलए यूनिवर्सिटी निरंतर रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस शोध कार्य में विभिन्न शैक्षणिक एवं फार्मास्युटिकल विशेषज्ञ सुनील प्रताप सिंह, डॉ. स्नेहा सिंह, डॉ. आलोक नाथ शर्मा की टीम ने भी योगदान दिया।

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