- वैभव सूर्यवंशी ने ट्राई सीरीज के फाइनल में श्रीलंका-ए के खिलाफ तूफानी पारी खेल इंडिया-ए की जीत में अहम भूमिका निभाई
दैनिक उजाला, स्पोर्ट्स डेस्क : वैभव सू्र्यवंशी को पता था कि श्रीलंका दौरे पर ट्राई सीरीज में उन पर ही निगाहें होंगी। 15 साल का ये बल्लेबाज इंडिया-ए का अहम बल्लेबाज माना जा रहा था। हालांकि, शुरुआती चार मैचों में उनके बल्ले से रन नहीं आए, लेकिन फाइनल में वैभव ने तूफान मचा दिया। वैभव ने अब बताया है कि कोच ऋषिकेष कानिटकर के शब्दों ने उनके अंदर जान फूंकी थी।
शुरुआती मैचों में वैभव अच्छी शुरुआत तो कर रहे थे, लेकिन उसे बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर पा रहे थे। चार मैचों में उनके बल्ले से सिर्फ 117 रन ही निकले थे, लेकिन फाइनल में वैभव ने सिर्फ 11 गेंदों पर अर्धशक जमाया और 29 गेंदों पर 94 रनों की पारी खेली। ये लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक है।
वैभव ने स्पोर्टस्टार से बात करते हुए बताया है कि जब उनके रन नहीं आ रहे थे तब उन्होंने कोच ऋषिकेश कानिटकर से बात की जिन्होंने उसे कहा कि अब अपना खेल खेलो। वैभव ने बताया, “जब रन नहीं आ रहे थे तब मैंने ऋषि सर से बात की और कुछ चीजों पर चर्चा की। उन्होंने मुझे खुलकर खेलने की बात कही। यहां की स्थितियां थोड़ी अलग हैं। इसलिए मुझे शुरुआत में कुछ दिक्कत आई।”
उन्होंने कहा,”मैं काफी कोशिश कर रहा था, लेकिन प्लान को लागू नहीं कर पा रहा था। तभी ऋषि सर ने कहा कि तून अपना नैचुरल गेम खेल, ज्यादा सोच मत। इससे मुझे मोटिवेशन मिला और मैंने अपना खेल खेला। मैं खुश हूं कि चीजों ने मेरे पक्ष में काम किया।”
मेरे ऊपर नहीं है दबाव
वैभव ने कहा कि उनके ऊपर किसी तरह का दबाव नहीं है और जब वह बल्लेबाजी करने जाते हैं उनकी कोशिश होती है कि वह प्लान को लागू करें। उन्होंने कहा, “मेरे ऊपर किसी तरह का दबाव नहीं है। जब मैं बल्लेबाजी करने गया तो सोच यही थी कि जो प्लान किया है वो शुरुआती 10 ओवरों में लागू करना है और इसके बाद आगे ले जाना है।”
वैभव की पारी के दम पर इंडिया-ए ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 377 रन बनाए थे। श्रीलंका-ए इस स्कोर के सामने 311 रनों पर ही ढेर हो गई।

