- आईआईएम बोधगया और एमआईटी पुणे में जीएलए छात्रों का शोध प्रस्तुत, एआई और जीएसटी पर रखा प्रभावशाली दृष्टिकोण
दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के छात्रों ने एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी शैक्षणिक क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया है। इंस्टिट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट के बीबीए (मैनेजमेंट साइंस) द्वितीय वर्ष के छात्र हर्ष अग्रवाल और एमबीए के छात्र तरुण भार्गव ने अलग-अलग प्रतिष्ठित कॉन्फ्रेंस में अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

हर्ष अग्रवाल ने भारतीय प्रबंधन संस्थान बोध गया में आयोजित द्वितीय अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग कॉन्फ्रेंस (आईसीएम 2.0) में अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उनके शोध का शीर्षक “फ्रॉम स्टैटिक पर्सनलाइजेशन टू अडाप्टिव डायलॉग द रोल ऑफ एलएलएम-पावर्ड जनरेटिव एआई इन मार्केटिंग कम्युनिकेशन” रहा। इस शोध में आधुनिक विपणन संचार में एलएलएम आधारित जनरेटिव एआई की भूमिका और प्रभावों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में यह बताया गया कि पारंपरिक स्टैटिक पर्सनलाइजेशन अब विकसित होकर अडाप्टिव डायलॉग और रियल-टाइम कम्युनिकेशन में बदल रहा है, जिससे उपभोक्ताओं के साथ अधिक प्रभावी और संवादात्मक जुड़ाव संभव हो रहा है।
यह शोध एक कॉन्सेप्चुअल स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें संरचित फ्रेमवर्क, मॉडल और पाँच प्रमुख प्रपोजिशन्स के माध्यम से एआई-आधारित मार्केटिंग के प्रभाव जैसे उपभोक्ता एक्सपीरियंस, एंगेजमेंट, पर्चेज इंटेंट और ब्रांड लॉयल्टीकृका विश्लेषण किया गया। साथ ही ट्रस्ट और एथिकल बाउंड्रीज जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को भी शामिल किया गया।

वहीं जीएलए विश्वविद्यालय के एमबीए छात्र तरुण भार्गव ने एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, पुणे में आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन जीएसटी रिफॉर्म्स में अपना शोध पत्र “असेसिंग द इम्पैक्ट ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) ऑन द ऑफलाइन रिटेल सेक्टर इन इंडिया” प्रस्तुत किया। उनके शोध में जीएसटी लागू होने के बाद ऑफलाइन रिटेल सेक्टर पर पड़े प्रभावों का विश्लेषण किया गया।
जहां नई चुनौतियां आई, वहीं कई अवसर भी उत्पन्न हुए
अध्ययन में टैक्स कंप्लायंस, ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और मार्केट कंपटीशन जैसे प्रमुख पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। शोध में यह उजागर किया गया कि जीएसटी के बाद पारंपरिक रिटेल व्यवसायों के सामने जहां नई चुनौतियां आई हैं, वहीं कई अवसर भी उत्पन्न हुए हैं, जिनसे उनके कार्य करने के तरीके में बदलाव आया है।
दोनों शोध कार्य इंस्टिट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रीति तरकर के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुए। उनके सतत मार्गदर्शन ने छात्रों को शोध के विभिन्न चरणों में दिशा प्रदान की और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सफल प्रस्तुति के लिए तैयार किया।
विभाग के निदेशक प्रो. अनुराग सिंह ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता छात्रों की मेहनत और विभाग में उपलब्ध शोध-उन्मुख वातावरण का परिणाम है। हम विद्यार्थियों को शुरुआत से ही रिसर्च और इनोवेशन के लिए प्रेरित करते हैं, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर सकें।
विभागाध्यक्ष डॉ. उत्कल खंडेलवाल एवं एसोसिएट विभागाध्यक्ष डा. कृष्णवीर सिंह ने कहा कि हम छात्रों को शुरुआत से ही रिसर्च-ओरिएंटेड लर्निंग के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान बना सकें। ऐसी उपलब्धियां विभाग की शैक्षणिक गुणवत्ता और छात्रों की मेहनत को दर्शाती हैं।

असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रीति तरकर ने दोनों शोध पत्रों में को-ऑथर की भूमिका निभाई, ने कहा कि वर्तमान समय में शोध केवल अकादमिक गतिविधि नहीं, बल्कि वास्तविक समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बन चुका है।

