नेपाल के गोरखा जिले में रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक बाढ़ आने से कई गांवों को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ में करीब 35 घर और 6 पुल बह गए, जबकि कम से कम 10 लोग लापता हैं। उनकी तलाश की जा रही है।
बाढ़ से 341 मेगावाट के बूढ़ी गंडकी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का निर्माण कैंप और कई मशीनें भी बह गईं। बाढ़ का पानी सुबह करीब 4 बजे बस्तियों में घुसा, जिसके बाद लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ऊंचे पहाड़ी इलाके में भूस्खलन के कारण चुन्चुब्री स्यारी नदी का रास्ता बंद हो गया था। इससे पानी जमा हुआ और फिर अचानक तेज बहाव के साथ नीचे आया।
इससे पहले 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई बाढ़ में 1455 लोगों की मौत हुई थी। साथ ही 5,285 लोग अब भी लापता हैं। सरकार ने बताया कि लगातार हो रहे भूस्खलन के बीच लापता लोगों की तलाश जारी है।
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पानी अचानक तेजी से नीचे आया और बूढ़ी गंडकी नदी के किनारे बने घर बह गए।

नदी के किनारे घर और बिल्डिंग बाढ़ की चपेट में आ गए।

सोती में बना मोटर पुल बाढ़ में बह गया। सोती का बाजार क्षेत्र भी पानी में डूब गया

सुरक्षा एजेंसियां सुबह से ही अलर्ट पर थीं और पानी बढ़ने के खतरे को देखते हुए लोग ऊंचे इलाके में चले गए।

बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ के बाद सेना ने राहत और बचाव अभियान चलाया।
बिहार में भी बाढ़ का खतरा
बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ आने से बिहार में भी खतरा बढ़ सकता है। यह नदी आगे त्रिशूली से मिलती है। फिर दोनों का पानी देवघाट के पास नारायणी नदी में पहुंचता है। यही नदी भारत में गंडक के नाम से बिहार में आती है और आगे गंगा में मिल जाती है।
ऐसे में अगर पानी का बहाव बढ़ता है, तो बिहार में गंडक किनारे बसे इलाकों पर असर पड़ सकता है। इनमें पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और वैशाली जैसे जिले शामिल हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि नेपाल में आई बाढ़ से बिहार में जलस्तर बढ़ेगा या नहीं।

