अयोध्या : अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बीच पूर्व केंद्रीय गृह सचिव लक्ष्मी नारायण ने दावा किया है कि उनकी सोने से मढ़ी रामचरितमानस चोरी हो गई है। उन्होंने कहा कि 8 अप्रैल 2024 को राम मंदिर ट्रस्ट को सवा क्विंटल की रामचरितमानस भेंट की थी, लेकिन आज तक उन्हें इसकी रसीद नहीं मिली। इतना ही नहीं, 3-4 महीने बाद मंदिर से रामचरितमानस गायब हो गई। इस रामायण के 1000 पन्नों पर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई गई है। इसकी कीमत 5 करोड़ थी।
उन्होंने एक मीडिया चैनल से बातचीत में कहा-

मैं अयोध्या पहुंचा, तो चंपत राय ने 9 घंटे तक इंतजार करवाया। मैंने उनसे हाथ जोड़कर कहा- सर, मेरी पूरी जिंदगी की पूंजी है। रामचरितमानस को मंदिर में रखवा दीजिए। तब उन्होंने कहा- मेरे पास कई लोगों के आभूषण और कई तरह की चीजें आती हैं, तो क्या मैं सिर्फ इन्हीं सब का डिस्प्ले करता रहूं?
पूर्व IAS ने कहा- मैंने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा और ट्रस्ट मेंबर गोपाल राव से संपर्क किया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। फिर मैं दोबारा अयोध्या गया। 4 घंटे इंतजार के बाद चंपत राय मिले। उन्होंने मुझसे कहा- मैं कुछ नहीं कर सकता, आपको जहां जाना है, जाइए।
इधर, मंदिर ट्रस्ट ने अपनी 6 जुलाई को होने वाली बैठक का शनिवार को एजेंडा जारी किया। इसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और न्यासी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर फैसला होगा। इसके अलावा SIT की शुरुआती रिपोर्ट और मंदिर प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर चर्चा की जाएगी।
वहीं, चंपत राय के ट्रस्ट से इस्तीफा देने को लेकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने तंज कसा। कहा- क्या इतने बड़े भगवान के दरबार में चोरी करके इस्तीफा देने से छुट्टी मिल जाएगी? ये क्या नाटक बना रखा है? पीटे जाओगे। अगर सरकार ने इनको जेल में नहीं डाला और सही सजा नहीं दिलवाई, तो जनता इनको पीटेगी।

यही वह रामचरितमानस है, जिसे पूर्व केंद्रीय गृह सचिव लक्ष्मी नारायण ने मंदिर ट्रस्ट को भेंट की थी।
विहिप की अयोध्या वाली बैठक अब दिल्ली में
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के साइड इफेक्ट्स अब संगठन पर दिखने लगे हैं। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने मीडिया अटेंशन, चल रही SIT जांच और पुलिस छापेमारी के बीच अपनी होने वाली केंद्रीय प्रबंध समिति की महत्वपूर्ण बैठक की जगह बदल दी है। पहले यह 5 दिवसीय बैठक जून में 25-29 तक अयोध्या में होनी थी। अब बैठक 18-19 जुलाई को दिल्ली में होगी। विहिप ने न सिर्फ बैठक की जगह बदली है, बल्कि इसमें शामिल होने वाले पदाधिकारियों की संख्या में भी भारी कटौती कर दी है। पहले इस बैठक में करीब 350 लोगों के जुटने की उम्मीद थी, लेकिन अब केवल 150 के लगभग ही लोग शामिल होंगे। हर प्रांत से 4 के बजाय अब केवल 2 पदाधिकारियों को ही दिल्ली बुलाया गया है।
अजय राय ने सीएम योगी को लिखा पत्र

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने सीएम योगी आदित्यनाथ को 2 पन्नों का पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने राम मंदिर के चढ़ावे, दान, भूमि खरीद, निर्माण कार्य और कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र और फोरेंसिक जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसलिए इससे जुड़े हर आर्थिक लेन-देन में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना जरूरी है।
5 करोड़ में तैयार हुई थी रामचरितमानस
रामचरितमानस 1000 पेज की है। वजन-155 किलोग्राम है। इसमें 4 Kg सोने और 151 किलोग्राम तांबे का इस्तेमाल किया गया है। हर पेज पर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई गई है। साथ ही हर पेज पर 3 किलोग्राम तांबा भी लगा है।
वुम्मिदी बंगारू ज्वैलर्स ने रामचरितमानस को 3 महीने में तैयार किया है। इसे बनाने में करीब 5 करोड़ रुपए खर्च आया है। इसी कंपनी ने नए संसद भवन में स्थापित सेंगोल (राजदंड) को तैयार किया है।
अखिलेश बोले- चढ़ावा चोरी करने वालों को न अयोध्या क्षमा करेगा, न ही देश
चंपत राय के समर्थन में उतरे संत, बोले- उनका इस्तीफा मंजूर न किया जाए
अयोध्या के संत ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के समर्थन में उतर गए हैं। संतों ने हजारा मंदिर में बैठक की। कहा कि चढ़ावा चोरी की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना ठीक नहीं है।
संतों ने कहा- ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। महंत राघवेश दास वेदांती ने कहा कि दान राशि में गड़बड़ी के आरोपों की सच्चाई एसआईटी जांच के बाद ही सामने आएगी।
चंपत राय ने राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण में वर्षों तक मेहनत की है। वह 1993 से अयोध्या में हैं। तब से हम चंपत राय को काम करते हुए देख रहे हैं। ट्रस्ट से मेरी अपील है कि चंपत राय का इस्तीफा मंजूर न किया जाए।
उन्होंने कहा- दान राशि में चोरी और धन के गलत इस्तेमाल के आरोप गंभीर हैं। लेकिन, एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और आगे का फैसला होना चाहिए।
बैठक में महंत राघवेश दास वेदांती, महंत शशिकांत दास, महंत राजीव लोचन, महंत वैदेही वल्लभ शरण, सीताराम दास, हरिमोहन शरण, रवि शंकर शरण समेत कई बड़े संत शामिल रहे।

