वाराणसी : मॉरीशस के PM नवीनचंद्र रामगुलाम बुधवार को वाराणसी पहुंचेंगे। वो 3 दिन के दौरे पर हैं। गुरुवार को PM मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। रामगुलाम की यह पहली विदेश यात्रा है।
मॉरीशस के PM रामगुलाम ने वार्ता के लिए वाराणसी को क्यों चुना? इसके जवाब में BHU के प्रोफेसर डॉ.आरपी पाठक बताते हैं-

मॉरिशस में भारतीय मूल की आबादी 70% से ज्यादा है। इनमें ज्यादातर लोग बलिया, आजमगढ़, वाराणसी और यूपी से सटे बिहार के तटवर्ती जिलों के हैं। इन जिलों से मॉरीशस जाने वाले पूर्वजों की पीढ़ी का केंद्र वाराणसी है। गिरमिटिया मजदूरों की जड़ें आज भी इन जिलों में हैं।
दूसरी ओर मॉरीशस के PM के काशी दौरे को बिहार चुनाव से भी जोड़कर देखा जा सकता है। रामगुलाम के इस दौरे से बिहार में चुनावी हलचल बढ़ेगी।
मार्च में ही मोदी ने दिया था न्योता
11 मार्च, 2025 ये वो तारीख है, जब मोदी मॉरीशस गए थे। तब उन्होंने रामगुलाम को भारत आने का निमंत्रण दिया था। उस दौरान ही तय हो गया था कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता वाराणसी में होगी।
BHU के प्रोफेसर डॉ. आरपी पाठक बताते हैं- वाराणसी मोदी का संसदीय क्षेत्र है। मॉरीशस के PM रामगुलाम का भी वाराणसी से पुराना जुड़ाव है। ऐसे में दोनों देशों के बीच वाराणसी से बेहतर दूसरा कोई शहर इस वार्ता के लिए हो ही नहीं सकता है।
बिहार चुनाव से जोड़ना सही नहीं
डॉ. आरपी पाठक बताते हैं- मॉरिशस के PM नवीनचंद्र रामगुलाम को बिहार चुनाव से जोड़कर देखना पूरी तरह से सही नहीं है। अगर ऐसा होता तो दोनों देशों की वार्ता वाराणसी से 252 Km दूर बिहार के पटना में होती। मगर रामगुलाम की वाराणसी में इस वक्त मौजूदगी, जब बिहार में चुनाव चल रहे हैं, एक खास जाति के वोटर पर असर तो पड़ेगा।
ये भी है कि मॉरिशस PM के दौरे को सत्तादल बिहार चुनाव में भुनाने की कोशिश करेगा। माना जा रहा है कि 10 जिलों की 30 सीटों पर असर पड़ सकता है। पूर्वांचल के सीमावर्ती इलाके में 20 जिले गिरमिटिया श्रमिकों की पैतृक स्थली से जुड़े हैं, जिनका वाराणसी आना-जाना लगा रहता है। ये अलग बात है कि नवीनचंद्र रामगुलाम का पैतृक गांव भोजपुर में है। वाराणसी से उनका घर करीब 100 Km दूर है। फिर भी उन्होंने अपने गांव जाने का कार्यक्रम नहीं बनाया है।
दोनों देशों के बीच व्यापार में बढ़ोतरी
2005 में दोनों देशों के बीच व्यापार 206 मिलियन डॉलर यानी 1792 करोड़ रुपए था, जो 2023-24 में बढ़कर 851 मिलियन डॉलर यानी 7403 करोड़ रुपए हो गया। इसके अलावा मॉरीशस भारत में इन्वेस्टमेंट का एक बड़ा जरिया रहा है। 2000 से अब तक मॉरीशस ने भारत में 175 अरब डॉलर यानी 1.4 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है।
इंटरनेशनल फोरम पर एक-दूसरे के समर्थक
मॉरीशस की आजादी के बावजूद चागोस द्वीप पर ब्रिटेन ने कब्जा बरकरार रखा था। इस विवाद में भारत ने हमेशा मॉरीशस को सपोर्ट किया। वहीं, मॉरीशस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में स्थायी सीट के लिए भारत की दावेदारी का हमेशा समर्थन किया है।
हिंद महासागर पर दोनों देश एकमत
भारत को घेरने और हिंद महासागर में दबदबा बढ़ाने के लिए चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर, श्रीलंका के हंबनटोटा से लेकर अफ्रीकी देशों में कई पोर्ट प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाया है। इसके जवाब में भारत ने हिंद महासागर में मौजूदगी बढ़ाने के लिए 2015 में सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन यानी ‘सागर प्रोजेक्ट’ शुरू किया था। इसके तहत भारत ने मॉरीशस के उत्तरी अगालेगा द्वीप पर मिलिट्री बेस तैयार किया है। यहां से भारत-मॉरीशस मिलकर पश्चिमी हिंद महासागर में चीन के सैन्य जहाजों और पनडुब्बियों पर नजर रख सकते हैं।
समुद्री निगरानी और खुफिया साझेदारी
भारत ने मॉरीशस में कोस्टल रडार सिस्टम और जॉइंट मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया है। वहीं, मॉरीशस ने गुरुग्राम में मौजूद इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर (IFC) जॉइन किया है, जहां हिंद महासागर की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी साझा की जाती है और समुद्र में होने वाली हरकतों पर नजर रखी जाती है।
मॉरीशस के भारतवंशियों को भारत में रहने की छूट
ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया यानी OCI के तहत भारत ने मॉरीशस के भारतवंशियों को काफी सुविधाएं दी हैं। इसके जरिए मॉरीशस के भारतवंशियों की 7 पीढ़ियों को भारत में स्थायी रूप से रहने और काम करने की इजाजत मिलती है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध को बेहतर करना है।

