- एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि यंग जनरेशन AI को लेकर पूरी तरह से सहज नहीं है, बताया जा रहा है कि युवा लोग AI के भविष्य के प्रभावों को लेकर बेचैन
दैनिक उजाला, टेक्नोलॉजी डेस्क नई दिल्ली : AI शायद भविष्य को नया रूप दे रहा हो, लेकिन जिस पीढ़ी से इसके साथ बड़े होने की उम्मीद है, वह इसे पूरी तरह से स्वीकार नहीं कर पा रही है। असल में, कई युवा इस बात को लेकर बेचैनी या शायद पूरी तरह से निराशा महसूस करने लगे हैं कि चीजें किस दिशा में जा रही हैं। एक नई रिपोर्ट बताती है कि Gen Z का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ रिलेशन लगातार कॉम्प्लिकेटेड होता जा रहा है। कई लोगों को इस बात की चिंता है कि ये टेक्नोलॉजी उनके भविष्य के करियर की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है, उनकी नौकरियां छीन सकती है और सीखने की प्रोसेस को आसान बनाने के बजाय और भी मुश्किल बना सकती है।
Gallup, GSV Ventures और Walton Family Foundation के हालिया सर्वे में Gen Z के जनरेटिव AI को लेकर नजरिए और अनुभवों का स्टडी किया गया। ये सर्वे टेक्नोलॉजी को लेकर युवाओं के बदलते रवैये को हाइलाइट करता है। जहां एक तरफ इस जनरेशन ने आमतौर पर नए इनोवेशन को अपनाने में तेजी दिखाई है, चाहे वह शुरुआती दिनों के कम्प्यूटर हों या स्मार्टफोन का तेजी से बढ़ता चलनो हो, वहीं इस बार उनकी प्रतिक्रिया कहीं ज्यादा सतर्कता भरी है।
रिसर्चर्स ने पाया कि जहां कई युवा AI का इस्तेमाल तो कर रहे हैं, वहीं इस पर उनका भरोसा लगातार कम होता जा रहा है। इस स्टडी से पता चलता है कि Gen Z के लगभग आधे, यानी 48 प्रतिशत पार्टिसिपेंट्स का मानना है कि वर्कप्लेस पर AI से फायदों के मुकाबले नुकसान ज्यादा होंगे।
असल में, स्टडी के मुताबिक पिछले एक साल में युवाओं के बीच AI को लेकर उत्साह में भारी गिरावट आई है। ये गिरावट 14 प्रतिशत अंकों की रही है। उम्मीद का स्तर भी नौ अंकों तक नीचे गिरा है। इसके उलट, AI को लेकर गुस्से की भावना लगातार बढ़ रही है। ये 22 प्रतिशत से बढ़कर 31 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसके साथ ही, चिंता भी बड़े पैमाने पर फैली हुई है और कई पार्टिसिपेंट्स इस टेक्नोलॉजी को लेकर अपनी आशंकाएं जाहिर कर रहे हैं।
स्टडी में ये भी बताया गया है कि एक ऐसे इंडस्ट्री के लिए, जो लंबे समय से नई टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने और पॉपुलर बनाने के लिए यंग यूजर्स पर निर्भर रहा है। ये बदलता हुआ मिजाज एक चिंताजनक संकेत हो सकता है।
और ये कोई कोरी चिंता नहीं है। कई पार्टिसिपेंट्स AI को अपने कोर स्किल्स और लॉन्ग-टर्म डेवलपमेंट के लिए एक खतरे के रूप में देखते हैं। स्टडी में इस बात पर जोर दिया गया है कि लगभग 80 प्रतिशत लोगों का मानना है कि AI को सीखने का एक आसान जरिया (शॉर्टकट) मानकर उस पर निर्भर रहना, अंततः सीखने की प्रोसेस को और भी कठिन बना देता है। उनका मानना है कि क्रिएटिविटी या क्रिटिकल थिंकिंग को बढ़ावा देने की जगह, ये टेक्नोलॉजी समय के साथ इन क्षमताओं को कमजोर कर सकती है।
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि Gen Z को इस बात पर अब भी यकीन नहीं है कि AI क्रिएटिविटी, क्रिटिकल थिंकिंग या एफिशिएंसी में किसी भी सही तरीके से सुधार ला सकता है। कई लोगों के लिए, सुविधा और क्षमता के बीच संतुलन बिठाना और उसे सही ठहराना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
फिर भी, पूरी तस्वीर इतनी भी निराशाजनक नहीं है। अपनी चिंताओं के बावजूद, Gen Z के कई स्टूडेंट्स ये मानते हैं कि AI उनके भविष्य का एक जरूरी हिस्सा होगा। ज्यादा से ज्यादा छात्र ये कह रहे हैं कि उन्हें हायर एजुकेशन और अपने करियर के लिए AI स्किल्स की जरूरत होगी और ज्यादातर का मानना है कि वे इसके हिसाब से खुद को ढाल लेंगे।
इस स्टडी का कॉन्क्लूजन ये है कि नेक्स्ट जनरेशन का भरोसा जीतने के लिए सिर्फ AI का एक्सेस होना ही अब काफी नहीं है। रिसर्चर्स का कहना है कि जैसे-जैसे AI को अपनाने की गति धीमी पड़ रही है और इसे लेकर संदेह बढ़ रहा है, कंपनियों, एजुकेटर्स और पॉलिसीमेकर्स के सामने ये चुनौती होगी कि वे लोगों का भरोसा फिर से जीतें। इसके लिए उन्हें ये दिखाना होगा कि AI ह्यूमन स्किल्स की जगह लेने के बजाय, उन्हें किस तरह से मदद कर सकता है।

