दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा में आयोजित 14वें भव्य दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने छात्रों को प्रेरणादायी संबोधन देते हुए कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथों में है और आने वाले वर्षों में वे ही देश को नई बुलंदियों तक पहुंचाएंगे।

उन्होंने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अब तकनीकी क्रांति का नेतृत्व कर रहा है। 2जी, 3जी और 4जी के समय भारत तकनीक के लिए विदेशों पर निर्भर था, लेकिन 5जी और आने वाली 6जी तकनीक में भारत विश्व स्तर पर अपना बेंचमार्क स्थापित कर रहा है। आज स्वास्थ्य, शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट सेवाओं, स्टार्टअप्स और ईकोसिस्टम के हर क्षेत्र में अनंत संभावनाएं जन्म ले रही हैं। उन्होंने गर्व से कहा कि आज भारत 1.6 लाख से अधिक स्टार्टअप्स के साथ दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है और युवा उद्यमिता, नवाचार तथा तकनीकी खोज के नए आयाम गढ़ रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, स्किल इंडिया 2.0, डिजिटल इंडिया और उद्यमिता प्रोत्साहन योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के भारत में न अवसरों की कमी है, न संसाधनों की कमी यदि कुछ है तो सिर्फ दृढ़ निश्चय की।
युवा उद्यमिता, नवाचार तथा तकनीकी खोज के नए आयामों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर आयोजित यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का अवसर नहीं, बल्कि एक ऐसा संस्कार है जो सदियों पुरानी भारतीय शिक्षा परंपरा का वाहक है। ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखने वाला व्यक्ति ही वास्तविक अर्थों में ज्ञानी होता है, और यह दीक्षांत दिवस प्रत्येक विद्यार्थी को आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और कर्मयोग की भावना के साथ आगे बढ़ने का अवसर देता है। उन्होंने उत्साहित विद्यार्थियों के चमकते चेहरों को देखकर कहा कि देश का भविष्य सुरक्षित हाथों में है और यह पीढ़ी राष्ट्र को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।

गीता के संदेश का उल्लेख करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि जब जीवन की राह कठिन हो, जब संशय खड़ा हो, जब भविष्य अनिश्चित दिखाई दे, तब श्रीकृष्ण का संदेश “कर्तव्य करो, साहस रखो” युवाओं को अडिग शक्ति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि छत्रों को मिली डिग्री केवल एक प्रमाणपत्र नहीं बल्कि एक ऐसी जिम्मेदारी का प्रतीक है जिसे निभाने से व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र सभी ज्ञान और विकास के नए मार्ग पर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि आज तक छात्रों का कैंपस विश्वविद्यालय था, किंतु अब पूरी दुनिया उनका कैंपस होगी; अनुभव उनके शिक्षक होंगे और खुद को साबित करना उनकी सबसे बड़ी परीक्षा। युवा जहां भी जाएं, वहां सकारात्मक परिवर्तन लेकर जाएं, किसी एक व्यक्ति के जीवन में खुशियां, समाधान या अवसर लेकर आएंकृइसी से मापा जाएगा कि उनकी शिक्षा समाज के लिए कितना सार्थक योगदान दे रही है।

आज की पीढ़ी डजिटल लिटरेट नहीं, डिजिटल नेटिव है

दीक्षांत समारोह में पंकज चौधरी ने कहा कि आज की पीढ़ी केवल डिजिटल लिटरेट नहीं, बल्कि डिजिटल नेटिव है। इंटरनेट, मोबाइल और तकनीकी नवाचार इनके जीवन का हिस्सा हैं। इसलिए भारत के पास यह अवसर है कि वह तकनीकी नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी नई पहचान गढ़ सके। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत 5जी और भविष्य की 6जी तकनीक में खुद का नेतृत्व स्थापित कर रहा है, उसी तरह युवा भी अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता के नए प्रतिमान गढ़ें।
उन्होंने विद्यार्थियों को गहराई से प्रेरित करते हुए कहा कि चुनौतियां, संघर्ष और विपरीत परिस्थितियां ही चरित्र का निर्माण करती हैं। जब-जब मनुष्य का विश्वास डगमगाता है, तब-तब सही निर्णय उसके जीवन की दिशा बदल देता है। उन्होंने जीवन के अनेक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन लोगों ने सफलता पाई है उन्होंने केवल प्रतिभा के भरोसे नहीं, बल्कि अपने व्यवहार, संयम, परिश्रम और निरंतर सीखने की क्षमता के बल पर इतिहास रचा है।

सीखने की ललक और ज्ञान की खोज समाप्त नहीं होती

उन्होंने भारतीय गुरुकुल परंपरा के ‘समावर्तन संस्कार’ का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थी जब गुरुकुल से विदा लेकर समाज में प्रवेश करता है, तो वह केवल एक छात्र नहीं रहता बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक, कर्मयोगी और देशनिर्माता बन जाता है। उन्होंने कहा कि औपचारिक शिक्षा का अंत यहां होता है, लेकिन सीखने की इच्छा और ज्ञान की खोज कभी समाप्त नहीं होनी चाहिए।
अंत में मंत्री ने अपने संबोधन का समापन गीता के ही संदेश से किया “मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है; जैसा वह विश्वास करता है, वैसा वह बन जाता है।” उन्होंने छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे जहां भी जाएं, उत्कृष्टता के उच्चतम शिखरों को प्राप्त करें और नया भारत आत्मनिर्भर, विकसित और नवाचारी भारत गढ़ने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

जीएलए की शिक्षा तकनीकी उत्कृष्टता के क्षेत्र में प्रशंसनीय : पंकज चौधरी

जीएलए विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट शिक्षा की सराहना करते हुए मुख्य अतिथि केन्द्रीय राज्यमंत्री वित्त मंत्रालय पंकज चौधरी ने कहा कि प्रगति रिपोर्ट के अनुसार जीएलए आज देश के उन चुनिंदा शैक्षणिक संस्थानों में है, जहाँ शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उसे कौशल, नवाचार और व्यवहारिक ज्ञान से जोड़कर भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है। विश्वविद्यालय ने शोध, उद्योग सहभागिता, स्टार्टअप संस्कृति और तकनीकी उत्कृष्टता के क्षेत्र में जिस गति से प्रगति की है, वह वास्तव में प्रशंसनीय है। यहां के छात्र अनुशासन, प्रतिभा और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जिस तरह राष्ट्रीयदृअंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियाँ हासिल कर रहे हैं, वह संस्थान की गुणवत्ता और प्रभावी शैक्षणिक प्रणाली का प्रमाण है। जीएलए विश्वविद्यालय ने शिक्षा के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की जो परंपरा स्थापित की है, वह ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को साकार करने में प्रेरक सिद्ध होगी।

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