- DND–फरीदाबाद-सोहना एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई लगभग 59.063 किमी है और इसकी अनुमानित लागत लगभग 4463 करोड़ रुपये है
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को DND–फरीदाबाद-सोहना एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। दिल्ली और नोएडा को जोड़ने वाले DND से शुरू होने वाला ये हाईवे फरीदाबाद और सोहना (गुरुग्राम) को आपस में जोड़ेगा। बताते चलें कि ये हाईवे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा है, जो जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक आसानी से और कम समय में पहुंचने में मदद करेगा। इस मौके पर, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टमटा, हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे।
भारतमाला परियोजना के तहत विकसित हो रहा है DND–फरीदाबाद-सोहना एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे
नितिन गडकरी ने बताया कि भारतमाला परियोजना के तहत विकसित हो रहे DND–फरीदाबाद-सोहना एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई लगभग 59.063 किमी है और इसकी अनुमानित लागत लगभग 4463 करोड़ रुपये है। ये कॉरिडोर दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुड़गांव और सोहना को एक हाई-स्पीड, 6-लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के माध्यम से जोड़ता है। इस प्रोजेक्ट में कई एडवांस्ड इंजीनियरिंग और आधुनिक निर्माण तकनीकें शामिल हैं। इसकी प्रमुख विशेषताओं में से एक 140 मीटर लंबे ‘नेटवर्क आर्क ब्रिज’ (NAB) का निर्माण है, जो भारत की सबसे एडवांस्ड स्टील ब्रिज स्ट्रक्चर में से एक है।
सड़क बनाने में इस्तेमाल हुई 2 लाख मीट्रिक टन ‘इनर्ट’ सामग्री
ये प्रोजेक्ट टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण पद्धतियों पर भी जोर देती है। ओखला और गाजीपुर लैंडफिल की ‘बायो-माइनिंग’ से उत्पन्न लगभग 2 लाख मीट्रिक टन ‘इनर्ट’ (निष्क्रिय) सामग्री का इस्तेमाल सड़क बनाने में किया गया, जिससे प्राकृतिक ‘बरो’ सामग्री पर निर्भरता कम हुई। ये हाईवे प्रोजेक्ट एक ऐतिहासिक विकास परियोजना है, जो आधुनिक पुल इंजीनियरिंग, उन्नत निर्माण तकनीक, टिकाऊ पद्धतियों और बेहतर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को प्रदर्शित करती है। ये परियोजना यात्रा के समय को काफी कम कर देगी, आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी और पूरे NCR में परिवहन बुनियादी ढांचे को उन्नत बनाएगी।
सड़क बनाने में इस्तेमाल हुई 2 लाख मीट्रिक टन ‘इनर्ट’ सामग्री
ये प्रोजेक्ट टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण पद्धतियों पर भी जोर देती है। ओखला और गाजीपुर लैंडफिल की ‘बायो-माइनिंग’ से उत्पन्न लगभग 2 लाख मीट्रिक टन ‘इनर्ट’ (निष्क्रिय) सामग्री का इस्तेमाल सड़क बनाने में किया गया, जिससे प्राकृतिक ‘बरो’ सामग्री पर निर्भरता कम हुई। ये हाईवे प्रोजेक्ट एक ऐतिहासिक विकास परियोजना है, जो आधुनिक पुल इंजीनियरिंग, उन्नत निर्माण तकनीक, टिकाऊ पद्धतियों और बेहतर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को प्रदर्शित करती है। ये परियोजना यात्रा के समय को काफी कम कर देगी, आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी और पूरे NCR में परिवहन बुनियादी ढांचे को उन्नत बनाएगी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा प्रोजेक्ट
ये प्रोजेक्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को हरियाणा में DND-फरीदाबाद बाईपास और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ेगी। साथ ही ये यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को भी जोड़ेगी। इस प्रोजेक्ट में फरीदाबाद, हरियाणा के पास चंदावली गांव से लेकर गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश में दयानापुर के पास तक फ्लेग्जिबल पेवमेंट वाली 6-लेन विभाजित कैरिजवे के साथ पूरी तरह से एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे बनाना शामिल है और फ्लेग्जिबल पेवमेंट वाली 8-लेन विभाजित कैरिजवे के साथ सड़क बनाना शामिल है। 31.425 किमी लंबाई वाले इस एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को 2,360 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है।
दिल्ली में कम होगा ट्रैफिक का दबाव
इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद, उत्तरी भारत से आने वाला ट्रैफिक नोएडा एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) का इस्तेमाल करेगा, जिससे दिल्ली में ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। इसके अलावा, दक्षिणी दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से आने वाला ट्रैफिक सीधे नोएडा एयरपोर्ट (जेवर में) तक पहुंच सकेगा। इस प्रोजेक्ट में DND-सोहना हाईवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और DFCC क्रॉसिंग पर एक ROB इस जगहों पर 4 मुख्य इंटरचेंज शामिल हैं।
NCR में आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स की कुशलता को मिलेगा बढ़ावा
प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर और DFCCIL क्रॉसिंग वाली जगह पर 8-लेन वाला ROB दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक सीधी और तेज कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इससे NCR में आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स की कुशलता को बढ़ावा मिलेगा। ये DND–बल्लभगढ़ बाईपास और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी का एक अहम हिस्सा है, जो दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। ये कॉरिडोर फरीदाबाद मास्टर प्लान 2031 वाले इलाके से होकर गुजरता है, जिसे ज्यादा आबादी वाले शहरी विकास और भविष्य में इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए तय किया गया है।

