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चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में अब नेता प्रतिपक्ष की भी होगी बड़ी भूमिका

नई दिल्ली : अडानी ग्रुप पर लगे आरोपों की जांच के लिए छह सदस्यीय कमेटी गठन के साथ-साथ गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक और बड़ा फैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट का दूसरा फैसला भारतीय निवार्चन आयोग से जुड़ा है।

दरअसल गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के संबंध में एक बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति सीबीआई प्रमुख के तर्ज पर हो। जिस तरह सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति एक कमेटी की अनुशंसा पर होती है, वैसे ही चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए भी सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी बनाने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता (एलओपी) व भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की एक समिति का गठन करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से चुनाव आयोग के काम और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होगी।

न्यायमूर्ति के.एम. जोसफ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि यह समिति तब तक रहेगी जब तक संसद इस संबंध में कानून नहीं बना देती। शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव आयोग को कार्यपालिका से स्वतंत्र रहना होगा। एक कमजोर चुनाव आयोग के परिणामस्वरूप कपटपूर्ण स्थिति पैदा होगी और आयोग की कुशलता प्रभावित होगी।

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