- 8 जून को दर्ज हुई एफआईआर, प्रताड़ना के कथित सबूत सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
सहपऊ/हाथरस : सहपऊ क्षेत्र की विवाहिता ममता उर्फ रूबी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में नया विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर पुलिस ने 8 जून को पति समेत छह लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया, वहीं दूसरी ओर मुकदमा दर्ज होने के एक सप्ताह बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने पर पीड़ित परिवार ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
मृतका के भाई मनोज कुमार का आरोप है कि उसकी बहन को शादी के बाद से लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। इस संबंध में कई बार पंचायतें हुईं और समझौते भी कराए गए। इतना ही नहीं, अब एक कथित लिखित सुलहनामा भी सामने आया है, जिसमें पति द्वारा भविष्य में पत्नी को परेशान न करने का आश्वासन दिए जाने का उल्लेख है। परिवार का कहना है कि समझौते के बाद भी प्रताड़ना बंद नहीं हुई।
मामले में अब कुछ कथित व्हाट्सएप चैट भी सामने आई हैं, जिनमें ममता अपने भाई से मदद मांगती दिखाई दे रही है। चैट में वह अपने ससुराल के हालात को लेकर चिंता व्यक्त करती नजर आ रही है। परिजनों का दावा है कि ये संदेश इस बात की ओर संकेत करते हैं कि मृतका लंबे समय से दबाव और तनाव में थी।
परिवार का आरोप है कि पुलिस के पास अब केवल शिकायत या आरोप ही नहीं, बल्कि पूर्व में हुए समझौते और कथित चैट जैसे महत्वपूर्ण तथ्य भी मौजूद हैं, इसके बावजूद नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की जा रही है। मृतका के भाई का कहना है कि यदि पुलिस समय रहते कार्रवाई करती तो परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद दिखाई देती, लेकिन अब तक की कार्यवाही से ऐसा प्रतीत नहीं होता।
मृतका के भाई मनोज कुमार ने आरोप लगाया कि पुलिस जानबूझकर मामले में नरमी बरत रही है। उनका कहना है कि मामले की गंभीरता के अनुरूप धाराएं भी नहीं लगाई गईं। उन्होंने पुलिस पर ससुराल पक्ष से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि नामजद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है।
गौरतलब है कि मनोज कुमार की तहरीर पर विजय शर्मा उर्फ लाला, मुकेश कुमार, कालीचरन उर्फ करुआ, लालता प्रसाद, कुसमा तथा सौरभ उर्फ बटना के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप है कि लगातार प्रताड़ना और उत्पीड़न के कारण ही ममता ने आत्मघाती कदम उठाया।



अब पीड़ित परिवार ने मामले में एसएसपी हाथरस से हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने, पूरे प्रकरण की समीक्षा करने और सभी नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित कराने की मांग की है। परिवार का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वह उच्च अधिकारियों और शासन स्तर तक न्याय की गुहार लगाएगा।
परिजनों के सवाल
- जब मुकदमा दर्ज हो चुका है तो गिरफ्तारी क्यों नहीं?
- कथित चैट और सुलहनामे की जांच में क्या प्रगति हुई?
- नामजद आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों हैं?
- एक सप्ताह बाद भी कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित क्यों है?

