Breaking
Mon. Jun 29th, 2026

भीषण गर्मी से AI भी बेहाल, डेटा सेंटर्स को ठंडा रखना बना चुनौती, टेक कंपनियां क्यों चिंंतित?

  • तपती गर्मी सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि AI के लिए भी चिंता का विषय बन गई है, दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों के लिए अपने AI डेटासेंटर्स को ठंडा रख पाना मुश्किल हो गया है

दैनिक उजाला, टेक्नोलॉजी डेस्क : अभी तक जिस गर्म मौसम से आप परेशान थे वह अब AI और उसे चलाने वाले डेटा सेंटर्स के लिए भी खतरा बन चुका है। दरअसर यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की वजह से अब AI कंपनियों के भी पसीने छूटने लगे हैं। इसके चलते डेटा सेंटर्स में इस्तेमाल होने वाली बेहद शक्तिशाली चिप्स को ठंडा रखना बड़ी चुनौती बन गया है। इससे बिजली ग्रिड पर दबाव भी पड़ रहा है और ब्लैकआउट का खतरा भी पैदा हो गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले तीन सालों में डेटा सेंटर्स को नुकसान पहुंचाने वाली बड़ी वजहों में खराब मौसम भी एक रहा है। AI और डेटा सेंटर्स के लिए मौसम की समस्या सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है बल्कि ग्लोबल स्तर पर एक खतरा बन चुकी है।

79% डेटा सेंटर्स पर मौसम का खतरा

  • रिपोर्ट्स के अनुसार दुनियाभर के लगभग 79% डेटा सेंटर क्षमता पर बाढ़, तेज हवाओं और जंगलों की आग जैसे खतरे मंडरा है।
  • एक्सपर्ट्स का यहां तक कहना है कि अब सवाल यह नहीं है कि मौसम डेटा सेंटरों को प्रभावित करेंगे या नहीं बल्कि सवाल यह है कि सेंटर्स को होने वाले नुकसान से कैसे बचा जाए?
  • ज्यूरिख इंश्योरेंस के मुताबिक, इस साल बन रहे 64% डेटा सेंटर पारंपरिक जगहों से दूर नए और ग्रामीण इलाकों में शिफ्ट हो रहे हैं।
  • वहां उन्हें खतरनाक बवंडर, ओलावृष्टि और तेज हवाओं का सामना करना पड़ रहा है।
  • यह मौसम डेटा सेंटर्स की छतों पर लगे कूलिंग टावरों को तबाह कर सकता है।

बिजली और गर्मी का दोहरा संकट

  1. डेटा सेंटर्स की बड़ी समस्या है कि उन्हें ठंडा रखने में कुल ऊर्जा का लगभग 40% हिस्सा खर्च होता है और जब मौसम गर्म हो तो यह मांग और ज्यादा बढ़ जाती है।
  2. इस वजह से जब बिजली ग्रिड के पास देने के लिए सबसे कम बिजली होती है, तब डेटा सेंटर्स को बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
  3. इसका एक उदाहरण इटली में देखने को मिला है, जहां ट्यूरिन शहर तापमान मई में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था और इस वजह से जमीन के नीचे बिछी केबल के गर्म होने की वजह से बार-बार ब्लैकआउट हो रहा था।
  4. इस स्थिति में अगर लाखों घरों जितनी बिजली खर्च करने वाले डेटा सेंटर्स जोड़ दिए जाएं, तो संकट कई गुना बढ़ सकता है।

टेक कंपनियों के इंतजाम

  • मौसम की मार से निपटने के लिए माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया जैसी दिग्गज कंपनियां अपने डेटा सेंटरों के डिजाइन में बड़े बदलाव कर रही हैं।
  • इसके लिए माइक्रोसॉफ्ट रियल टाइम मॉनिटरिंग औरबैकअप सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है।
  • इसी तरह एनवीडिया के नए AI सर्वर अब 45 डिग्री सेल्सियस तक के गर्म कूलिंग लिक्विड पर भी काम कर सकते हैं।
  • एनवीडिया के अनुसार, सर्वर को ठंडा करने वाले सिस्टम का तापमान महज 1 डिग्री बढ़ाने से भी कूलिंग में खर्च होने वाली बिजली की लागत करीब 4% तक कम हो जाती है।
  • इसी तरह अब यूरोपीय प्रोजेक्ट्स में भी क्लाइमेट चेंज फैक्टर को लागत में जोड़ा जा रहा है।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *