Breaking
Mon. Jul 27th, 2026

बरेली में पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल, दरोगा ने निर्माणाधीन मकान की दीवार गिराई

  • बरेली के कुछ पुलिसकर्मी सवालों के घेरे में आ गए हैं, उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसको लेकर तरह तरह की बातें की जा रही हैं

उत्तर प्रदेश के बरेली के थाना फरीदपुर इलाके की पुलिस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यशैली को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। वायरल वीडियो में एक उप निरीक्षक (दरोगा ) निर्माणाधीन दीवार को पैर मारकर गिराते दिखाई दे रहे हैं, जबकि उनके साथ मौजूद एक सिपाही फावड़े से दीवार की ईंटें उखाड़ता नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

भुता के थाना फरीदपुर में मकान को लेकर चल रहा है विवाद

बताया जा रहा है कि यह मामला बरेली के ब्लॉक भुता के थाना फरीदपुर इलाके के ग्राम कैरुआ का है। ग्राम निवासी संजय शास्त्री और उनके परिवार के बीच करीब 20 साल पुराने पैतृक जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा है। इसी जमीन पर निर्माण कार्य शुरू हुआ तो दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। विवाद बढ़ने पर सूचना 112 पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया और शांति भंग की कार्रवाई करते हुए फिलहाल निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर गिरानी शुरू कर दी दीवार

बताया जा रहा है पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पूरी होने के बाद हल्का संख्या-2 में तैनात उपनिरीक्षक परविंदर कुमार एक सिपाही के साथ फिर मौके पर पहुंचे। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने किसी न्यायालय के आदेश, राजस्व विभाग की मौजूदगी या प्रशासनिक अनुमति के बिना निर्माणाधीन दीवार गिरानी शुरू कर दी। वीडियो में उपनिरीक्षक दीवार पर पैर मारते दिखाई दे रहे हैं, जबकि साथ आया सिपाही फावड़े से ईंटें निकालता नजर आ रहा है। मौके पर मौजूद कुछ गांववालों ने घटना अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर ली। इसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो फैलते ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। 

फरीदपुर सीओ ने नहीं की बात, आधिकारिक बयान आना बाकी

फरीदपुर सीओ से इस मामले में संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने बैठक में व्यस्त होने की बात कही। फिलहाल इस मामले में पुलिस के अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मामले में दरोगा परविंदर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह पहले ट्रैफिक पुलिस में तैनात थे और हाल ही में पदोन्नति के बाद सिविल पुलिस में आए हैं। उनका कहना है कि सिविल मामलों के नियमों की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण उनसे यह गलती हो गई।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *