कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के रुझान सामने आने लगे हैं और यह लगभग तय हो चला है कि सूबे में अगली सरकार भारतीय जनता पार्टी ही बनाएगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस इन चुनावों में बीजेपी के आगे बेबस नजर आई है। सामने आ रहे रुझानों को देखकर तमाम लोगों को हैरानी हो रही है कि आखिर पिछले 15 सालों से ममता का गढ़ रहे बंगाल में बीजेपी की आंधी कैसे आ गई। दरअसल इस प्रदर्शन के पीछे बीजेपी की कमाल की रणनीति रही है। आइए, हम आपको उन 5 वादों को बारे में बताते हैं, जिनके असर की काट TMC ढूंढ़ ही नहीं पाई।
1. घुसपैठियों को बाहर करने का वादा
बीजेपी ने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार घुसपैठ के मुद्दे को उठाया। पार्टी का कहना था कि राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की पहचान कर उन्हें बाहर किया जाएगा। इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय लोगों के अधिकारों से जोड़कर पेश किया गया। खासतौर पर सीमावर्ती इलाकों में यह वादा लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना रहा। बता दें कि पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में बड़ी संख्या में घुसपैठ की खबरें सामने आई थीं, और स्थानीय निवासियों को उनसे दिक्कत महसूस होती थी। ऐसे में बीजेपी के इस वादे ने काफी काम किया।
2. जनकल्याणकारी योजनाओं का वादा
बीजेपी ने आम लोगों के लिए कई नई जनकल्याणकारी योजनाओं का वादा किया। इसमें गरीबों, किसानों और महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं शामिल थीं। पार्टी ने दावा किया कि केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य में सही तरीके से लागू किया जाएगा। साथ ही पार्टी ने ऐलान किया था कि अगर सूबे में बीजेपी की सरकार बनती है तो मई महीने से राज्य की हर महिला के बैंक खाते में 3000 रुपए भेजे जाएंगे। इसके साथ बेरोजगार युवाओं के खातों में भी 3000 रुपए प्रति माह जमा कराने का वादा किया गया था। बंगाल के रुझानों को देखते हुए कहा जा सकता है कि बीजेपी का यह वादा काम कर गया।
3. कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने का वादा
कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी बीजेपी के प्रचार का अहम हिस्सा रहा। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य में अपराध और हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। आरजी कर मेडिकल कॉलेज के ‘रेप ऐंड मर्डर केस’ ने पश्चिम बंगाल की छवि न सिर्फ पूरे देश में खराब की, बल्कि सूबे में भी इसे लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली। ऐसे ही कई मामलों की नजीर देते हुए बीजेपी ने वादा किया कि सत्ता में आने पर कानून-व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और सूबे में योगी आदित्यनाथ का यूपी मॉडल लागू किया जाएगा। साथ ही अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की ‘गुंडागर्दी’ पर भी लगाम कसने और उन्हें ‘उल्टा लटकाकर सीधा करने’ की भी बात कही। इस मुद्दे ने खासकर शहरी और मध्यम वर्ग के मतदाताओं के बीच असर डाला।
4. भ्रष्टाचार को खत्म करने का वादा
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा बीजेपी ने जोर-शोर से किया। पार्टी ने कहा कि सरकारी योजनाओं में हो रही गड़बड़ियों और घोटालों पर रोक लगाई जाएगी। बीजेपी के नेताओं ने लगातार पारदर्शिता बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का भरोसा दिया गया। पार्टी ने TMC पर ‘सिंडिकेट राज’ चलाने का आरोप लगाया और कहा कि 5 तारीख को भाजपा की सरकार बनते ही राज्य में टीएमसी के सभी सिंडिकेट खत्म कर दिए जाएंगे। इस मुद्दे ने उन मतदाताओं को प्रभावित किया जो लंबे समय से सिस्टम में सुधार की उम्मीद कर रहे थे।
5. उद्योग-धंधों को वापस लाने का वादा
बीजेपी ने राज्य में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने का भी वादा किया। पार्टी का कहना था कि बंगाल में बंद हो चुके उद्योगों को फिर से शुरू किया जाएगा और नए निवेशकों को आकर्षित किया जाएगा। बीजेपी नेताओं ने बार-बार कहा कि उद्योग धंधे आने से सूबे में नौजवानों को रोजगार मिलेगा और बेरोजगारी में कमी आएगी। युवाओं और व्यापार से जुड़े लोगों के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय बना रहा। इसके अलावा बीजेपी ने किसानों से उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने का वादा किया जिसने कही न कहीं कृषक वर्ग को प्रभावित किया।
बीजेपी के वादों की काट नहीं ढूंढ़ पाई तृणमूल
ऐसे में देखा जाए तो बीजेपी ने अपने 5 वादों के जरिए बंगाल में अपनी रणनीति को अच्छी तरह जमीन पर उतारने में कामयाबी हासिल की। बीजेपी के इन वादों की काट तृणमूल कांग्रेस ढूंढ़ ही नहीं पाई और पिछले 15 सालों से सत्ता में होना भी उसके खिलाफ गया। जनता ने TMC के वादों से ज्यादा बीजेपी के वादों पर यकीन किया और यही वजह है कि बीजेपी आजादी के बाद प्रचंड बहुमत के साथ सूबे में पहली बार अपनी सरकार बनाती दिख रही है।

