- इंडस्ट्री 4.0, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक्स एवं पीएसयू सेक्टर में बढ़ी मांग, राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने जताया भरोसा
दैनिक उजाला, मथुरा : भारत तेजी से विनिर्माण, ऑटोमेशन, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना रहा है। ऐसे समय में कुशल मैकेनिकल इंजीनियरिंग एवं मेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी दिशा में जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा का मैकेनिकल इंजीनियरिंग एवं मेक्ट्रॉनिक्स विभाग उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार कर रहा है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के कैंपस प्लेसमेंट में विभाग के 97 प्रतिशत विद्यार्थियों का चयन देश की प्रतिष्ठित कंपनियों में हुआ है।
कैंपस प्लेसमेंट के दौरान अडानी ग्रुप, वोल्टास बेको, टाटा कंसल्टेंसी इंजीनियरिंग,हौंडा पावर, सीमेंस, जे के टायर, यूनो मिंडा, इसजैक हेवी इंजीनियरिंग, एफकॉन इंफ्रास्ट्रक्चर, मिंडा कॉर्पोरेशन, शापूरजी पल्लोनजी, एसएम्एस ग्रुप, जेएसडब्ल्यू, वीका ग्रुप सहित अनेक राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने विद्यार्थियों की तकनीकी दक्षता, नवाचार क्षमता और व्यावहारिक ज्ञान का मूल्यांकन कर रोजगार के अवसर प्रदान किए। विगत वर्षों में विभाग के चयनित विद्यार्थियों का औसत वार्षिक पैकेज 6.5 से 7 लाख रुपये के बीच रहा है, जो उद्योग में 2 से 3 वर्षों के अनुभव के साथ सामान्यतः दो से तीन गुना तक बढ़ जाता है। इससे विद्यार्थियों को दीर्घकालिक करियर विकास एवं नेतृत्व के उत्कृष्ट अवसर प्राप्त होते हैं।
विभाग के विद्यार्थियों को विनिर्माण, डिजाइन, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, एआई-इनेबल्ड रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ऑटोमोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग तथा 3डी प्रिंटिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में रोजगार एवं इंटर्नशिप के अवसर प्राप्त हुए हैं।
इस्जेक में चयनित छात्र सुधीर ने बताया कि विभाग में आधुनिक प्रयोगशालाएं, उद्योग आधारित पाठ्यक्रम, प्रोजेक्ट-आधारित शिक्षण, अनुसंधान संस्कृति तथा सुदृढ़ प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट प्रणाली ही विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करती हैं। यही कारण है कि जीएलए विश्वविद्यालय का मैकेनिकल इंजीनियरिंग एवं मेक्ट्रॉनिक्स विभाग रोजगार, उच्च शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में निरंतर नई उपलब्धियां अर्जित कर रहा है तथा भविष्य के उद्योगों के लिए सक्षम इंजीनियर तैयार कर रहा है।
मैकेनिकल इंजीनियरिंग एवं मेक्ट्रॉनिक्स आज केवल पारंपरिक मशीनों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्मार्ट फैक्ट्री, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, रोबोटिक्स, एआई आधारित उत्पादन प्रणालियों तथा उन्नत विनिर्माण तकनीकों की आधारशिला बन चुके हैं। यही कारण है कि सार्वजनिक उपक्रमों में भी मैकेनिकल इंजीनियरिंग एवं मेक्ट्रॉनिक्स पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों की मांग निरंतर बढ़ रही है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, एनटीपीसी, एनएचपीसी, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स तथा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों में गेट के माध्यम से बड़ी संख्या में अवसर उपलब्ध होते हैं।
विभागाध्यक्ष प्रो. पीयूष सिंघल ने बताया कि वर्तमान समय में उद्योग ऐसे इंजीनियरों की तलाश में हैं जो डिजाइन, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स, डेटा आधारित निर्णय प्रणाली, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग और स्मार्ट उत्पादन तकनीकों को समझते हों। इसी उद्देश्य से विभाग में बी.टेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग तथा बी.टेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग (मेक्ट्रॉनिक्स स्पेशलाइजेशन) के अंतर्गत उद्योगोन्मुखी पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इनमें इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, एआई आधारित रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऑटोमोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी, मशीन लर्निंग तथा एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (3डी प्रिंटिंग) जैसे अत्याधुनिक विषय शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि मेक्ट्रॉनिक्स एवं स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर का अनुभव प्रदान करने के लिए विभाग ने आईआईटी दिल्ली की एफएसएम लैब के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू स्थापित किया है। इस सहयोग के अंतर्गत विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, विशेषज्ञ प्रशिक्षण, उन्नत प्रयोगशालाओं तक पहुंच तथा सेमेस्टर एक्सचेंज कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। यह पहल विद्यार्थियों को उद्योग एवं अनुसंधान जगत की नवीनतम तकनीकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

