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Fri. Feb 13th, 2026

यूपी उपचुनाव में ओबीसी वोट बैंक बना गेम-चेंजर, दिलचस्प होगा चुनावी नतीजा

लखनऊ : यूपी की नौ विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए भाजपा, सपा ने अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है। सपा के पीडीए (पिछड़ा दलित व अल्पसंख्यक) कार्ड के सामने भाजपा ने ओबीसी कार्ड फेंका है। वहीं, बसपा ने टिकट बांटने में सर्वजन समाज को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है।

भारतीय जनता पार्टी ने 24 अक्टूबर को उपचुनाव वाली 9 सीटों पर अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया। मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट भाजपा ने अपने सहयोगी रालोद के लिए छोड़ी है। कुंदरकी सीट पर रामवीर सिंह ठाकुर को उतारा गया है। रामवीर 2012 व 2017 में भी इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं, मगर जीत नहीं पाए थे। गाजियाबाद भाजपा के महानगर अध्यक्ष संजीव को गाजियाबाद सदर से प्रत्याशी बनाया है। अलीगढ़ की खैर सुरक्षित सीट से हाथरस के पूर्व सांसद राजवीर दिलेर के पुत्र सुरेंद्र दिलेर को उतारा गया है। भाजपा ने ओबीसी वर्ग को चार, सवर्ण को तीन और दलित वर्ग को एक टिकट दिया है।

समाजवादी पार्टी ने विधानसभा उपचुनाव में 24 अक्टूबर को तीन और प्रत्याशी घोषित कर दिए। यूपी में अब सपा कांग्रेस के सहयोग से सभी नौ सीटों पर खुद चुनाव लड़ेगी। इन नौ सीटों पर सपा ने एक बार फिर पीडीए पर दांव लगाया है। सपा ने गाजियाबाद में सपा ने राज जाटव और अलीगढ़ की खैर सीट से चारू कैन को प्रत्याशी घोषित किया है। चारू कैन कांग्रेस की नेता हैं। कांग्रेस से वहां चुनाव लड़तीं तो उन्हें ही टिकट मिलता। अब वह सपा की प्रत्याशी हो गईं हैं।

वहीं, मुरादाबाद की कुंदरकी से सपा ने मोहम्मद रिजवान को प्रत्याशी बनाया है। इस तरह नौ सीटों में चार मुस्लिम हैं। तीन प्रत्याशी ओबीसी वर्ग से आते हैं। दो दलित वर्ग से हैं। अभी मिल्कीपुर सीट पर चुनाव की तारीख का ऐलान नहीं हुआ है। यहां सपा पहले ही अजीत प्रसाद को प्रत्याशी बना चुकी है।

बसपा को सोशल इंजीनियरिंग से उम्मीद 

बसपा ने विधानसभा उपचुनाव की आठ सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। अलीगढ़ की खैर सीट पर उम्मीदवारी को लेकर अभी भी पेंच फंसा हुआ है। बसपा यहां से चारू केन को टिकट देना चाहती थी, लेकिन उनके कांग्रेसी होने के बाद मनचाहा उम्मीदवार नहीं मिल पा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार को उम्मीदवारी तय कर दी जाएगी। बसपा ने जिन आठ सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित किए हैं उसमें सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले का ध्यान रखा गया है।

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