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प्रोफेसर के आइडिया से एक साथ निकलेंगे गलनांक-क्वथनांक, जानिए कैसे

  • जीएलए विश्वविद्यालय फार्मेसी के प्रोफेसर ने गलनांक-क्वथनांक एक साथ निकालने के लिए सुझाया आधुनिक आइडिया

मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के फार्मेसी विभाग के प्रोफेसर ने एक नया तकनीकी आइडिया सुझाया है। इस आइडिया के माध्यम से अब एक साथ ही गलनांक (मेल्टिंग पाॅइंट) और क्वथनांक (बाॅइलिंग पाॅइंट) थिएल्स ट्यूब के माध्यम से निकाले जा सकते हैं। अभी तक कैपिलरी ट्यूब और इन्ग्निशन ट्यूब को थर्मामीटर के सहारे किसी भी प्रकार से बांधकर अथवा चिपकाकर कार्य पूर्ण किया जाता है। प्रोफेसर के आइडिया का पेटेंट भी पब्लिश हो गया है।

फार्मेसी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. योगेश मूर्ति ने ‘मोडीफाइड एपेरेटस टू डिटरमाइन मेल्टिंग/बाॅइलिंग पाॅइंट ऑफ़ आर्गेनिक कम्पाउंड्स‘ विषय पर एक तकनीक आइडिया तैयार कर पेटेंट पब्लिश कराया है। इस आइडिया में उन्होंने सर्वप्रथम थर्मामीटर के आकार में ऊपर और नीचे से परिवर्तन किया है। इसके साथ ही एक रबर की रिंग सिस्टम तैयार की है, जिसके बीच थर्मामीटर के आकार की जगह के साथ ही दाएं और बाएं कैपिलरी ट्यूब और इग्निशन ट्यूब की जगह भी तैयार की है।

प्रोफेसर मूर्ति ने थर्मामीटर के आकार परिवर्तन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि थर्मामीटर का जो हिस्सा थिल्स ट्यूब के अंदर पहुंचेगा उस हिस्से को हल्का मोटा और उससे ऊपर के हिस्से को पतला रखा है। जिससे कि रबर सिस्टम में कैपिलरी ट्यूब और इग्निषियन ट्यूब को एक साथ थर्मामीटर के साथ फिट किया जा सके और एक साथ ही गलनांक और क्वथनांक यानि तरल और ठोस पदार्थ का बाॅइलिंग एवं मेल्टिंग पाॅइंट आसानी से नापा जा सकता है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में कैपिलरी को थर्मामीटर पर चिपकाने में कई बार समय लग जाता है, तो कई बार प्रयोग करते समय कैपिलरी थर्मामीटर से अलग हो जाती है। इसी प्रकार क्वथनांक निकालने के लिए इग्नीशन ट्यूब को थर्मामीटर से बांधना पड़ता है और उसमें भी समय लगता है। इन्ही समस्याओं के निवारण के लिए एक उपकरण की रचना तैयार की है, जिससे समय की बचत होगी साथ ही शोधकर्ता रिसर्च लैब में आसानी से अनुसंधान को बढ़ावा दे सकेंगे।

विभागाध्यक्ष प्रो. मीनाक्षी वाजपेई ने इस पेटेंट आइडिया की प्रशंसा की और बताया कि यह एक इनोवेटिव सोच का अच्छा उदाहरण है। इस उपकरण के माध्यम से अलग-अलग कंपाउंड्स का क्वथनांक व गलनांक साथ में माप सकते हैं, जिससे समय और उष्मा ऊर्जा का सदुपयोग हो सकेगा।
डीन रिसर्च प्रो. कमल शर्मा ने बताया कि इस आइडिया के पेटेंट ग्रांट होने के बाद कोई भी रासायनिक उपकरण बनाने वाली कंपनी इसको खरीद के अपनी कंपनी में तैयार कर बाजार में बेच सकेगी। यह उपकरण सभी रासायनिक प्रयोगशालाओं में काम में लाया जा सकता है।

थर्मामीटर के आकार में होगा परिवर्तन
जीएलए फार्मेसी विभाग के असिस्टेंट प्राफेसर डाॅ. योगेश मूर्ति के अनुसार क्वथनांक और गलनांक को आसानी से निकालने के थर्मामीटर में परिवर्तन करने के आसार जताये हैं। उन्होंने कहा है कि बाॅइलिंग/मेल्टिंग पाॅइंट निकालने के लिए थर्मामीटर में परिवर्तन करना उचित रहेगा। थर्मामीटर के परिवर्तन में नीचे से हल्का मोटा और ऊपरी सतह को पतला किया जायेगा, जिससे कि रबर सिस्टम आसानी से थर्मामीटर में फिट हो सके।

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