मथुरा : संस्कृति विश्वविद्यालय में संस्कृति स्कूल आफ इंजीनियरिंग एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (एसओईआईटी) द्वारा प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक व्यावसायिक जीवन से जोड़ने के उद्देश्य से एक विशेष व्याख्यान सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम “मंत्र ध्यान की शक्ति: व्यावसायिक जीवन में सुख और सफलता का प्रभावी साधन।” विषय को लेकर आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्कृति विवि के प्रति कुलपति डॉ. रघुराम भट्ट ने अपने भारतीय ज्ञानपरंपरा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने मानव जीवन के चार आश्रमों ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि ये जीवन के विभिन्न चरणों में व्यक्ति को अनुशासन और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एक सही गुरु के मार्गदर्शन से व्यक्ति अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन का सही अर्थ समझ सकता है और संतुलित एवं सफल जीवन जी सकता है।
मुख्य वक्ता पंचगौड़ा प्रभुजी, इस्कान मंदिर के अध्यक्ष ने मंत्र ध्यान की महत्ता औरउसके जीवन पर सकारात्मक प्रभावों को अत्यंत सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। प्रभुजी ने बताया कि मंत्र ध्यान आज के तनावपूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण में मानसिक शांति, भावनात्मक स्थिरता और आंतरिक संतुलन प्राप्त करने का एक प्रभावी साधन है। उन्होंने विशेष रूप से विद्यार्थियों में बढ़ती मानसिक समस्याओं जैसे तनाव, चिंता, एकाग्रता की कमी और शैक्षणिक दबाव पर प्रकाश डाला और बताया कि नियमित मंत्र ध्यान से मन शांत होता है, नकारात्मक विचारों में कमी आती है और भावनात्मक दृढ़ता बढ़ती है।
उन्होंने यह भी बताया कि ध्यान का अभ्यास करने वाले विद्यार्थी अपने अध्ययन में अधिक एकाग्र रहते हैं, ध्यान भटकाव को नियंत्रित कर पाते हैं और निरंतरता बनाए रखते हैं। करियर विकास से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि शांत और केंद्रित मन बेहतर निर्णय लेने, उत्पादकता बढ़ाने और प्रभावी संवाद कौशल विकसित करने में सहायक होता है, जो व्यावसायिक सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. पंकज कुमार गोस्वामी, डीन एसओईआईटी द्वारा स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय ज्ञान प्रणाली के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह न केवल शिक्षा में उत्कृष्टता प्रदान करती है, बल्कि व्यावसायिक जीवन में भी संतुलन और सफलता प्राप्त करने का मार्ग दिखातीहै। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय परंपराओं में निहित ज्ञान विद्यार्थियों को अध्ययन और नौकरी दोनों में वास्तविक खुशी प्राप्त करने में सहायक होता है।
कार्यक्रम में इस्कॉन के भक्त राधाचरण दास, परमात्मा दास, अनुत्तम तत्त्व दास, गोविंद प्रेम दास, भक्त विग्नेश एवंइंद्रद्युम्न दास उपस्थित रहे, जिन्होंने भजन एवं मंत्रोच्चारण के माध्यम से विद्यार्थियों को एक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया। कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और उपयोगी सिद्ध हुआ। इससे उन्हें न केवल शैक्षणिक दबाव को संभालने के व्यावहारिक उपाय मिले, बल्कि जीवन के प्रति सकारात्मक और अनुशासित दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा भी प्राप्त हुई।

