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जीएलए में नवाचार से कृषि को बेहतर बनाने का दिया प्रशिक्षण

  • जीएलए के कृषि संकाय ने आयोजित किया ‘कृषि उत्सव‘ कार्यक्रम

दैनिक उजाला, मथुरा : किसानों से देश खडा है, किसानों से यह धरा है, किसानों की बात जरूरी है, किसानों में हिम्मत पूरी है। इसी बात को ध्यान में रखकर जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के कृषि विज्ञान संकाय के द्वारा ‘कृषि उत्सव‘ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जीएलए के आसपास गांवों के सैकड़ों किसान पहुंचे और उन्नत किस्म की फसलों की जानकारी ली।

विदित रहे कि विश्वविद्यालय का कृषि विज्ञान संकाय अपने अथक प्रयासों के कारण जाना जाता है। किसानों के हित में अपने अथक प्रयासों को लेकर आगे बढ़ रहा जीएलए कृषि संकाय ने एक कार्यक्रम के तहत अपने आसपास के किसानों को एकजुट कर कार्यक्रम में पहुंचे मुख्य वक्ता के रूप में पद्मश्री सम्मानित जगदीश प्रसाद पारीक से रूबरू कराया।

पारीक ने कृषि से जुडे विभिन्न नवाचारों के बारे मे जानकारी दी। उन्होंने कई ऐसे नवाचारों के बारे मे बताया जिनके उपयोग से कम लागत में अनेक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।

उन्होने किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभ बताये एवं प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया तथा कम लागत वाली पॉली हाउस की संरचना से किसानों को अवगत कराया। उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्तर की सभा के अनुभव साझा करते हुए किसानों से कृषि में नवीन तरीकों को अपनाने का आग्रह किया।

उन्होंने बताया कि दुनियां भर में कई छोटे किसान आज भी उसी तरह खेती करते हैं जैसे उनके पूर्वज हज़ारों साल पहले करते थे। पारंपरिक खेती के तरीके कुछ लोगों के लिए कारगर हो सकते हैं, लेकिन नई पद्धतियां कई लोगों को पैदावार, मिट्टी की गुणवत्ता और प्राकृतिक पूंजी के साथ-साथ खाद्य और पोषण सुरक्षा में काफी सुधार करने में मदद कर सकती हैं। इसी दौरान मौके पर आझई एवं अकबरपुर के किसानों ने मुख्य वक्ता से विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछे।

संकाय के शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों ने भी मुख्य वक्ता से प्रश्न पूछ कर अपनी जिज्ञासा शांत की।
संकाय के डीन डा. सुरेन्द्र सिंह सिवाच ने कहा कि जीएलए के कृषि संकाय ने किसानों के हित के लिए तमाम प्रयास किए हैं। गांव-गांव पहुंचकर कृषि विज्ञान संकाय की टीम किसानों से मिलकर उनकी समस्या जानकर उन पर रिसर्च करती है। इसके बाद ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को उनकी समस्या के समाधान पर विचार विमर्श कर समाधान पेश करती है। कार्यक्रम के अंत में डीन ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह् भेंट किया। इस अवसर पर कार्यक्रम की संयोजक डा. भूमि सुथार सहित संकाय के शिक्षकों का सहयोग सराहनीय रहा।

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