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पुलिस को चकमा देकर बच सकते हैं, पर दुर्घटना को नहीं

दैनिक उजाला, संवाद मथुरा : आज-कल सड़कों पर नाबालिक लड़के लड़कियां फर्राटा भरते दिखाई दे जाएंगे, जिसकी वजह से आए दिन कई घरों के चिराग समय से पहले ही बुझ जाते हैं । कई नाबालिग बच्चे सड़क पर पुलिस की चेकिंग और चालान कटने के डर से पुलिस को चकमा देकर, चालाकी से तेज़ी से निकल जाते हैं और फिर मन ही मन खुश होते हैं। इसलिए समझना होगा कि होगा कि पुलिस को धोखा देकर बच सकते हैं,पर दुर्घटना को नहीं।

किसान नेता रामवीर सिंह तोमर कहते हैं कि असल में गलती बच्चों से ज्यादा, उनके माता-पिता की है, जो उन्हें बाइक या गाड़ी तो दे देते हैं, पर जिम्मेदारी और समझ नहीं देते। मां बाप का फर्ज बनता है कि वह नाबालिग बच्चों को बाइक, गाड़ी तब तक चलाने को न दें, जब तक कि वह इस बालिग न हो जाएं। जब बालिग हो जाएं तो सबसे पहले उनका ड्राइविंग लाइसेंस बनवाएं। उसके बाद हेलमेट और सीट बैल्ट के महत्व को समझा कर ही सड़कों पर उतरने दें।

सबसे महत्वपूर्ण बात हम सबको समझनी होगी कि पुलिस चेकिंग इसलिए होती है कि कोई हादसे के बाद मुश्किल में न पड़े, पुलिस चैकिंग लोगों के हित के लिए की जाती है न कि परेशान करने के लिए। दो पहिया वाहनों के चालकों के हेलमेट और फोर व्हीलर चालकों के सीट बैल्ट चैक करने के पीछे का मकसद भी वाहन चालकों की सुरक्षा होता है क्योंकि दुर्घटना पहले किसी से इजाज़त नहीं लेती। अपने देश में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में लगभग डेढ़ लाख लोगों की मौत हो जाती है। इस आंकड़े को कम से कम करने की जिम्मेदारी हम सब की बनती है। इसलिए हमें समझना होगा कि हम पुलिस को धोखा देकर बच सकते हैं,पर दुर्घटना को नहीं। दुर्घटना से देर भली।

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