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Fri. Apr 24th, 2026

कानपुर के डीएम से विवाद के बीच CMO हरदत्त नेमी सस्पेंड, सीएम योगी के पास पहुंचा था मामला

कानपुर : कानपुर डीएम और सीएमओ के बीच चल रहा विवाद सीएम योगी तक पहुंच गया है। दोनों अधिकारियों की फाइलें CMO ऑफिस तलब हुई हैं। इसके बाद गुरुवार को सीएमओ का सस्पेंड करने का शासनादेश जारी हो गया। उनकी जगह श्रावस्ती के डॉ. उदयनाथ को कानपुर के सीएमओ का चार्ज दिया गया है।

ब्यूरोक्रेसी की इस लड़ाई में BJP और सपा के दिग्गज भी आमने-सामने आ चुके हैं। इनमें विधानसभा अध्यक्ष, BJP के 3 विधायक और 1 MLC शामिल हैं। वहीं, सपा से अखिलेश यादव और 2 विधायक इस पूरे मामले को CM वर्सेस डिप्टी सीएम बना रहे हैं।

वजह यह है कि इन अधिकारियों का फेवर करने में BJP के नेता ही दो फाड़ हो गए हैं। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, MLC अरुण पाठक और विधायक सुरेंद्र मैथानी ने सीएमओ डॉ. हरी दत्त नेमी का ट्रांसफर नहीं करने का लेटर शासन को लिखा है। जाहिर है, इसको डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का फेवर करते हुए देखा जा रहा है। जबकि, 2 BJP विधायक अभिजीत सिंह सांगा और महेश त्रिवेदी ने डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह को सही बताते हुए लेटर लिखे हैं।

सीएमओ डॉ. हरी दत्त नेमी ने वीडियो जारी कर कहा- सीबीआई चार्जशीटेड फर्म का 30 लाख का पेमेंट रोका था, अब मेरे खिलाफ षडयंत्र हो रहा है। कानपुर की ब्यूरोक्रेसी में ये विवाद क्यों हुआ? क्यों BJP और सपा के नेता वार-पलटवार कर रहे हैं?

5 फरवरी को सीएमओ कार्यालय पर डीएम ने छापा मारा था। तब सीएमओ समेत 34 अधिकारी-कर्मचारी गैरहाजिर मिले थे।
5 फरवरी को सीएमओ कार्यालय पर डीएम ने छापा मारा था। तब सीएमओ समेत 34 अधिकारी-कर्मचारी गैरहाजिर मिले थे।

BJP के नेताओं ने डिप्टी सीएम को लेटर भेजे

यह विवाद 5 फरवरी, 2025 से शुरू हुआ, जब कानपुर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने सीएमओ ऑफिस में छापा मारा था। इस दौरान सीएमओ डॉ. हरी दत्त नेमी समेत 34 अधिकारी-कर्मचारी गैरहाजिर मिले थे। डीएम ने सीएमओ कार्यालय से ही एक वीडियो जारी किया। कहा- रजिस्टर में नाम लिखे हैं, लेकिन 34 अधिकारी-कर्मचारी ऑफिस में नहीं मिले। सभी का एक दिन का वेतन रोक दिया गया था।

इस एक्शन के बाद डीएम और सीएमओ के बीच खटास शुरू हुई। इससे पहले डीएम लगातार सीएचसी और पीएचसी पहुंचकर कमियां उजागर कर रहे थे। इस मामले ने तब और तूल पकड़ा, जब डीएम के कहने पर भी सीएमओ ने लापरवाह अधिकारी-कर्मचारियों पर कोई एक्शन नहीं लिया।

15 अप्रैल, 2025 को डीएम ने शासन को एक लेटर लिखा। इसमें कानपुर सीएमओ को हटाने के लिए कहा गया। एडमिनिस्ट्रेशन सोर्स के मुताबिक, 5 जून के बाद भी सीएमओ को हटाने के लिए शासन को लेटर लिखा गया। इस बीच सीएमओ भी अपना ट्रांसफर रुकवाने के लिए एक्टिव हो गए।

सीएमओ का एक वीडियो भी सामने आया। इसमें उन्होंने कहा- जेएम फार्मा का बिल पेमेंट होना था, मेरे ऊपर दबाव बनाया गया। फर्म सीबीआई चार्जशीटेड थी। इसकी खामियों को लेकर 125 पेज की रिपोर्ट तैयार की। इसको अधिकारियों के पास भेजा गया। सीनियर फाइनेंस अधिकारी वंदना सिंह ने डीएम को लेटर भी भेजा था। अब मेरे खिलाफ षडयंत्र हो रहा।

सीएमओ सतीश महाना से मिले, तब मामला डिप्टी सीएम तक पहुंचा

यहीं से इस मामले में सियासत शुरू हुई। सीएमओ ने विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से मुलाकात की। कहा कि BJP सांसद, विधायकों के सुझाव मैंने हमेशा माने। मरीजों को अच्छा इलाज दिलाया, फिर भी मेरे ट्रांसफर की संस्तुति की गई है। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को 11 जून को लेटर लिखा कि सीएमओ साहब का व्यवहार आम जनता को लेकर ठीक है। ऐसे में इनका ट्रांसफर रोकने पर विचार किया जा सकता है।

इसके बाद 2 और BJP विधायक सीएमओ के सपोर्ट में आ गए। उन्होंने भी डिप्टी सीएम को लेटर भेजे। MLC अरुण पाठक ने 14 जून और विधायक सुरेंद्र मैथानी ने 15 जून को लेटर लिखा।

BJP में दो फाड़ तब शुरू हुई, जब 16 जून को बिठूर विधानसभा से BJP विधायक अभिजीत सिंह ने सीएमओ को भ्रष्टाचारी बताते हुए सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिख दिया। फिर BJP विधायक महेश त्रिवेदी ने भी सीएमओ के खिलाफ लेटर लिख दिया।

इस सियासत के बीच सीएमओ के ड्राइवर सूरज का ऑडियो वायरल हुआ। ड्राइवर ने डीएम को भ्रष्टाचारी बताया। इसके बाद 13 जून को सीएमओ का एक और ऑडियो वायरल हुआ। इसमें सीएमओ ने कहा कि डीएम ढोल ज्यादा बजा रहा है। किसी दिन कोई महिला अधिकारी बदतमीजी कर देगी।

यह तस्वीर 14 जून की है, जब डीएम ने सीएमओ को बैठक से बाहर कर दिया था। लाल घेरे में सीएमओ की खाली कुर्सी है।

यह तस्वीर 14 जून की है, जब डीएम ने सीएमओ को बैठक से बाहर कर दिया था। लाल घेरे में सीएमओ की खाली कुर्सी है।

इसके बाद 14 जून को कानपुर DM ने सीएम डैशबोर्ड की समीक्षा बैठक से मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को बाहर कर दिया। सीएमओ का दावा है कि डीएम ने मीटिंग में मुझसे कहा- CMO साहब आप तो AI हो गए थे। लेकिन, आप तो जिंदा हो और यहां बैठे हो।

फिर डीएम ने मुझसे पूछा कि CMO साहब यह सब क्या हो रहा है? मैंने कहा कि यह ऑडियो मेरा नहीं है। किसी ने AI से बनाकर इसको वायरल किया है। फिर डीएम ने कहा- आप इसकी जांच करें। पता करें कि किसने इस फेक ऑडियो को बनाया है। इसे वायरल किया है। जाकर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएं। फिर डीएम ने मेरा हाथ पकड़कर बाहर जाने को कहा। मैं बैठक से बाहर चला गया।

अखिलेश ने कहा- ये अधिकारियों की नहीं, सीएम और डिप्टी सीएम की लड़ाई

17 जून को यह मामला स्टेट लेवल पर उछल गया। लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ब्यूरोक्रेसी की इस खींचतान को मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम के बीच का विवाद बता दिया। उन्होंने कहा कि ये लड़ाई सीएम और डिप्टी सीएम के बीच है। डबल इंजन सरकार के इंजन टकराने लगे, उसके डिब्बे टकराने लगे, अब गार्ड भी टकराने लगे हैं। इसी का नतीजा है कि कोई कूटा जा रहा है, कोई पीटा जा रहा।

अखिलेश ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएमओ और डीएम के विवाद पर तंज कसा था।

अखिलेश ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएमओ और डीएम के विवाद पर तंज कसा था।

सपा विधायक अमिताभ ने कहा- सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त

कानपुर की आर्यनगर सीट से सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने कहा था कि हम दर्शक बनकर देख रहे हैं। अधिकारियों के विवाद में आम आदमी ठगा जा रहा है। सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति बात करती है। जबकि अधिकारियों का विवाद ये दर्शाता है कि सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त है।

विधायक ने आगे कहा कि ये लड़ाई असल में डीएम और सीएमओ की नहीं है। ये लड़ाई मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम के बीच की है। जो विधायक जिस गोल का है, उसी अधिकारी के पक्ष में लेटर लिख रहा। जनता सब देख रही है, बर्दाश्त कर रही है।

सपा विधायक बोले- सीएमओ ने अच्छा करने का प्रयास किया

सपा विधायक मो. हसन रूमी ने मामले में बताया कि कानपुर डीएम ने कांशीराम अस्पताल का निरीक्षण किया था। स्वास्थ्य सेवाओं को अच्छा करने का प्रयास किया था। पब्लिक को उनसे कोई शिकायत नहीं है।

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