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मस्क ने राजनीतिक दल बनाया, नाम रखा- अमेरिका पार्टी:कहा- रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों भ्रष्ट

वॉशिंगटन डीसी : अरबपति बिजनेसमैन इलॉन मस्क ने शनिवार को अमेरिका में एक नई पॉलिटिकल पार्टी बनाने का ऐलान किया। उन्होंने इसका नाम ‘अमेरिका पार्टी’ रखा है। मस्क ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी।

उन्होंने लिखा- आज अमेरिका पार्टी का गठन किया जा रहा है, ताकि आपको आपकी आजादी वापस मिल सके।” इसे लेकर उन्होंने X पर पब्लिक पोल भी किया था।

मस्क ने अपने पोस्ट में कहा कि आप में 66% लोग एक नई राजनीतिक पार्टी चाहते हैं और अब यह आपको मिलेगी। जब बात अमेरिका को बर्बाद करने और भ्रष्टाचार की आती है तो अमेरिका में दोनों पार्टी (रिपब्लिकन और डेमोक्रेट) एक ही जैसी हैं। अब देश को 2 पार्टी सिस्टम से आजादी मिलेगी।

मस्क ने 4 जुलाई को अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर X पर एक पोल पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने पूछा था कि क्या आप दो पार्टी वाले सिस्टम से आजादी चाहते हैं? क्या हमें अमेरिका पार्टी बनानी चाहिए? पोल के नतीजों में 65.4% लोगों ने “हां” और 34.6% ने “नहीं” में वोट दिया।

अमेरिका का टू पार्टी सिस्टम क्या है?

अमेरिका की राजनीति में बीते डेढ़ सौ साल से डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दो ही पार्टियों का दबदबा रहा है। देश में राष्ट्रपति चुनाव से लेकर राज्यों की विधानसभाओं तक इन दोनों दलों का वर्चस्व हैं। इस टू-पार्टी सिस्टम को अमेरिकी लोकतंत्र की स्थिरता की वजह भी माना जाता है।

डेमोक्रेटिक पार्टी की शुरुआत 1828 में एंड्रू जैक्सन के दौर में हुई। यह शुरुआत में किसानों और आम जनता की पार्टी मानी जाती थी।

20वीं सदी में यह सामाजिक कल्याण, न्यू डील जैसे आर्थिक सुधारों और नागरिक अधिकारों की पैरोकार बनी।

वहीं, रिपब्लिकन पार्टी 1854 में गुलामी के विरोध में बनी और अब्राहम लिंकन इसके पहले राष्ट्रपति बने। 20वीं सदी में यह व्यापार और टैक्स कट के समर्थन वाली पार्टी बन गई।

क्यों तीसरी पार्टी सफल नहीं हो पाई?

अमेरिका में कई बार तीसरी पार्टियां बनाई गईं, लेकिन सफल नहीं हो सकीं। 1912 में राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट ने बुल मूस पार्टी बनाई और 88 इलेक्टोरल वोट हासिल किए।

हालांकि पार्टी अगले चुनाव तक भी नहीं टिक सकी। 1992 में रॉस पेरोट ने 19% पॉपुलर वोट लिए, फिर भी एक भी इलेक्टोरल वोट नहीं मिला।

इन दलों को फंडिंग, संगठन और मीडिया में जगह नहीं मिलती। वोटर्स भी उन्हें वोट काटने वाला मानते हैं। यही वजह है कि लिबर्टेरियन या ग्रीन पार्टी जैसी पार्टियां अब तक राष्ट्रपति चुनाव में 3-4% से ज्यादा वोट नहीं ले पाईं।

अमेरिका में तीसरी पार्टी के सफल न हो पाने की बड़ी वजह इसका का चुनावी सिस्टम है। यहां का चुनावी ढांचा टू पार्टी सिस्टम को सपोर्ट करता है।

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