- बिहार के मुंगेर जिले में एक सरकारी विभाग ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है कि पूरे सरकारी विभाग को हंसी का पात्र बनना पड़ रहा है
मुंगेर : अक्सर आपने सुना होगा कि शिक्षा विभाग द्वारा गलती से किसी हीरो या हीरोइन का एडमिट कार्ड जारी कर दिया गया। इसके अलावा किसी जानवर का वोटर कार्ड या आधार कार्ड बनवा दिया गया। लेकिन मुंगेर में इस बार एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। दरअसल यहां सदर प्रखंड कार्यालय द्वारा एक ट्रैक्टर का आवासीय प्रमाण पत्र (निवास प्रमाण पत्र) जारी कर दिया गया है। आवासीय प्रमाण पत्र और उसमें दिख रही ट्रैक्टर की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस मामले पर सदर एसओ ने संज्ञान लेते हुए इस प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया है और आगे इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं।
ट्रैक्टर का बना दिया आवासीय प्रमाण पत्र
बता दें कि मुंगेर सदर प्रखंड कार्यालय द्वारा जिस ट्रैक्टर का आवासीय प्रमाण पत्र जारी किया गया है, उसमें ट्रैक्टर की फोटो भी लगी है। आवासीय प्रमाण पत्र में नाम के आगे सोनालिका कुमारी, पिता- बेगूसराय, मां- बलिया देवी, गांव- ट्रैक्टरपुर दियारा, वार्ड 17, डाकघर- कुत्तापुर, पिन कोड 811202, थाना व प्रखंड- मुफ्फसिल सदर मुंगेर, जिला मुंगेर लिखा गया है। प्रमाण पत्र की तस्वीर अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जो कि मुंगेर सदर प्रखंड की लापरवाही को दर्शाने का काम कर रही है कि कैसे डाटा एंट्री ऑपरेटर के द्वारा बिना जांच किए, इस प्रमाण पत्र को जारी कर दिया गया, जिस कारण पूरे कार्यालय को हंसी का पात्र बनना पड़ रहा है।
एसडीओ अभिषेक कुमार ने लिया एक्शन
बता दें कि जब यह मामला सदर एसडीओ कुमार अभिषेक के सामने आया तो उन्होंने तुरंत इस बात पर संज्ञान लेते हुए प्रमाण पत्र को रद्द करने और यह कैसे बन गया इसपर जांच का निर्देश दिया। लेकिन यह प्रमाण पत्र अपने आप में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि क्या कोई भी, इस तरह किसी भी चीज का प्रमाण पत्र बनाने के लिए विभाग को आवेदन दे सकता है। इसके अलावा क्या विभाग द्वारा बिना जांच-पड़ताल के कोई भी प्रमाण पत्र बना दिया जाएगा। बता दें कि 6 जुलाई को किसी ने शरारत करते हुए इस तरह का ऑनलाइन आवेदन कर दिया था। इसमें न केवल आवेदन करने वाले की गलती है, बल्कि पूरे सिस्टम की खामी है, जिसने बिना जांच-पड़ताल के ही इस प्रमाण पत्र को जारी कर दिया।

