- शिक्षाविद् डा. जेसी चौधरी और फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा मानद् उपाधि से सम्मानित
दैनिक उजाला, मथुरा : संस्कृति विश्वविद्यालय का छठवां दीक्षांत समारोह संतों की उपस्थिति में भव्य और दिव्य वातावरण में संपन्न हुआ। विद्यार्थियों के अथक परिश्रम के परिणामस्वरूप प्राप्त फल के रूप में उनको पदक और उपाधियां प्रदान की गईं। मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्रीयगान की परंपरा को पूर्ण करते हुए दीक्षांत समारोह का शुभारंभ हुआ।

समारोह के दौरान संस्कृति विवि के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता द्वारा आकाश इंस्टीट्यूट के संस्थापक, ख्यातिप्राप्त शिक्षक, न्यूमरोलॉजिस्ट डा. जेसी चौधरी और बालीवुड के प्रसिद्ध कलाकार, कवि, लेखक और वक्ता आशुतोष राणा को मानद उपाधि से विभूषित किया। समारोह में लगभग 2045 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इसके साथ ही 20 विद्यार्थियों को पीएचडी की डिग्री से विभूषित किया गया।
दीक्षांत समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा ने अपने गुरुजनों को धन्यवाद देते हुए कहा कि तीन चीज़ों से एक इंसान को सदैव बच कर रहना चाहिए, आदि, व्याधि और उपाधि क्योंकि बाक़ी दोनों का इलाज हो सकता है पर उपाधि का घमंड अगर हो जाये तो उसका इलाज नहीं है।
नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा के पूर्व छात्र और हिंदी, तेलुगू और तमिल फ़िल्म में अपने अभिनय का डंका बजा चुके आशुतोष राणा ने कहा कि वे विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता के आभारी हैं जिन्होंने उन्हें इस उपाधि से नवाज़ा और वे ख़ुद को ख़ुशक़िस्मत मानते हैं की उन्हें यह उपाधि संस्कृति विश्वविद्यालय से मिली है।
मानद् उपाधि से सम्मानित प्रख्यात शिक्षाविद्, अनेक पुस्तकों के लेखक डा.जेसी चौधरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज आपको मिली यह डिग्री आपकी शिक्षा का अंत नहीं है, यह सच है कि अभी तक आपने जो समय व्यतीत किया वो आपके जीवन का सबसे गोल्डन पीरियड था, असली जिंदगी तो अब शुरुआत है, यह दीक्षा का अंत नहीं है। अभी तो ज़िंदगी शुरू हुई है। ज़िंदगी में जो मिल जाये उससे कभी भी संतुष्ट नहीं होना चाहिए और अपने लिए हमेशा बेहतर की तलाश करते रहना चाहिए। यदि परमात्मा आपको किसी मुसीबत में डाल रहे हैं तो वे चाहते हैं कि आप उससे जूझ कर कुछ सीखें और अपने भविष्य को उज्जवल बनायें। उन्होंने कहा कि मैं आज भी लगातार कुछ नया सीखने का प्रयास करता हूं, आपको यह प्रयास हमेशा करते रहना है।
संस्कृति विवि के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आपको जीवन में कभी हार नहीं माननी है। हमारे सामने कैसी भी चुनौती आए डटे रहना है, एक दिन सफलता जरूर मिलेगी। उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी कर डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
विवि के कुलपति प्रो. एमबी चेट्टी ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट पढ़ते हुए कहा कि हमारे कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता भारत के सबसे कम उमर के कुलाधिपति हैं और उनका लक्ष्य विश्वविद्यालय को सबसे तेज गति से प्रगति करने वाली शिक्षा संस्था के रूप में आगे लेके जाने का है। विश्वविद्यालय में विश्व स्तर की शिक्षा, 25 स्टार्टअप्स और अमेरिका एवं यूके के शिक्षण संस्थानों के साथ महत्वपूर्ण एमओयू साइन हुए हैं। इसरो के यमुना नदी प्रोजेक्ट में भी संस्कृति विश्वविद्यालय मदद कर रहा है।
नैलनाक्ष एस व्यास (आईआईटी कानपुर) ने कहा कि यह दीक्षा का अंत नहीं है, यह तो शिक्षा की शुरुआत है। बस अब आपको ज़िंदगी सिखाएगी। शिक्षा प्रणाली और एआई के उपयोग के बारे में भी छात्रों को बताया।
एआईयू के चेयरमैन विनय कुमार पाठक ने बताया कि अध्यापक, अभिभावक और छात्र तीनो छात्र की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। शिक्षा का कोई अंत नहीं होता और दीक्षा जीवन जीने का तरीका है। दीक्षा का प्रयोजन पुरातन है। सुदीप गोयंका(गोल्डी ग्रुप) ने विश्वविद्यालय के कुलाधिपति(डॉ सचिन गुप्ता), प्रति कुलाधिपति राजेश गुप्ता एवं चेयरमैन विज़न ग्रुप के मुकेश गुप्ता को विश्वविद्यालय के ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश की उपाधि से सम्बोधित किया। विद्यार्थियों से उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का यह सफ़र आपकी ज़िंदगी का सबसे यादगार सफ़र होने वाला है। विश्वविद्यालय के 10000 विद्यार्थियों में से कोई भी कल का कुलपति हो सकता है।
भव्य और दिव्य वातावरण में संपन्न हुए संस्कृति विवि के छठे दीक्षांत समारोह की शुरुआत शैक्षणिक प्रोसेशन से हुई। आगे-आगे चल रहे एनसीसी कैडेट और गुरुकुल के विद्यार्थी इस प्रोसेशन को एक अलौकिक स्वरूप प्रदान कर रहे थे। सुबह से ही कार्यक्रम के लिए छात्रों में डिग्रियां पाने के लिए आतुरता नजर आ रही थी।
छात्र कल्याण डीन डॉ धर्मेंद्र एस तोमर ने कार्यक्रम में सभी अध्यापकों, छात्रों एवं अभिभावकों का स्वागत किया।
कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता ने मंच पर आसीन आशुतोष राणा, अनन्तश्री विभूषित जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी सतीशाचार्यजी महाराज, महामंडलेश्वर हेमांगी सखी माँ, पूज्य चिन्मयानंद बापू जी, डॉ नलिनाक्ष एस व्यास आईआईटी कानपुर, शारदा सर्वज्ञ पीठाधीश्वर अनंतश्री स्वामी अमृतानंद देवतीर्थजी, आचार्य मनीष जी(हिम्स चंडीगढ़), डॉ जे सी चौधरी जी (आकाश इंस्टिट्यूट), सुदीप गोयंका (गोल्डी ग्रुप), प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ( चेयरमैन ए आई यू ), डॉ सचिन गुप्ता ( कुलाधिपति संस्कृति विश्वविद्यालय), राजेश गुप्ता प्रति कुलाधिपति संस्कृति विश्वविद्यालय), मुकेश गुप्ता( चेयरमैन विज़न ग्रुप), डॉ एम बी चेट्टी ( कुलपति संस्कृति विश्वविद्यालय), डॉ मीनाक्षी शर्मा ( सीईओ संस्कृति विश्वविद्यालय) का पटुका ओढ़ाकर एवं स्मृतिचिह्न देकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम का कुशल संचालन संस्कृति प्लेसमेंट सेल की अधिकारी ज्योति यादव एवं विकास कौशिक ने किया।
21 को मिली पीएचडी की डिग्री
कुलपति प्रो. एमबी चेट्टी ने 21 पीएचडी की उपाधि वाले छात्रों को मंच पर आमंत्रित किया और सभी अतिथियों ने मिलकर उनको उपाधि से नवाज़ा। उसके बाद मास्टर्स वाले 232 छात्रों, उनके बाद 1277 बैचलर्स और 515 डिप्लोमा वाले छात्रों को उनकी उपाधि प्रदान की गई और उन्हें शपथ दिलवायी गई। साथ ही अपने विषय में विशेष दक्षता हासिर करने वाले 45 विद्यार्थियों को गोल्ड, 44 को सिल्वर और 39 विद्यार्थियों को ब्रोंज मेडल देकर सम्मानित किया गया।
दीक्षांत समारोह में मेधावी हुए पदकों से सम्मानित
संस्कृति विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह में डिग्रियां पाकर विद्यार्थियों के चेहरे चमक उठे। ये डिग्रियां उनके अथक परिश्रम का परिणाम थीं, जो उनके भविष्य का निर्माण करेंगी। समारोह में विभिन्न विषयों में कुल 2045 उपाधियां वितरित की गईं। इस दौरान शोध पूरा करने वाले 20 शोधार्थियों को पीएचडी की डिग्री प्रदान की गईं।
छठे दीक्षांत समारोह में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में शांभवी विश्वास, शाइली मकूकू, निकिता भदौरिया, मोहिनी कुमारी, मोनिका गोयल, शालू, छवि यादव, करिश्मा गुप्ता, दिव्यांशी वार्ष्णेय, वर्षा अग्रवाल, दर्शिका, शर्मा नंदिनी हरेंद्र, महेश, कुलदीप सिंह, सौरभ, कुमारी अंशिका सिंह चाहर, लक्ष्मी नारायण, शीला कुमारी, तनीषा चाहर, निमिषा स्वरूप, लक्ष्मी, आरती कुमारी, निधि अरविंद, सोनम गौतम, सीजल रोहिल्ला, तृषा शर्मा, कृर्त शिवांग, दिगाला परिमला रानी, मोहिनी कुंतल, प्रिंस, प्रभात कुमार, तेजवीर, आदित्य शर्मा, रामवीर, प्रीति लोधी, सुमित सिंह, प्रत्यक्षा रोहिल्ला, नीतीश यादव, धीरज राजपूत, दीपांशी, इति, वसीम, रोहित अरोड़ा, फारूकी मुस्कान अनीस अहमद, कुमारी खुशबू अहेरिया, लवली को गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया।
द्वितीय स्थान पाने वाली विद्यार्थी साधना, राहुल सिंह, कुमारी चांदनी बानो, निखिल बेनीवाल, हिमांशी शर्मा, आयुष गर्ग, दीपाली सिंह, नरेश सिंह, च्येष्ठा अग्रवाल, पूजा, लखन कुमार, अनुकृति झा, सौम्या गुप्ता, चंद्र प्रताप सिंह, सचिन कुशवाहा, यश सोनी, आदित्य उपाध्याय, सुमन कुमारी, प्रथु भारद्वाज, आलोक वर्मा, वंशिका अग्रवाल, हिमांशी टुटेजा, कुमारी काजल, दीपक, अभिषेक कुमार राजन, अनुष्का, हैसविनी मेगांडा, आरती चौधरी, लेखराम, उमाशंकर शर्मा, अभिषेक कुमार, सत्य प्रकाश, उत्तम सिंह, आनंद सिंह, करिश्मा, अनुष्का अग्रवाल, प्रकाश चंद, चारू शर्मा, नूतन यादव, कुमारी योग प्रभा गर्ग, प्रियंका वर्मा, जावेद अहमद, कृष्ण चंद्र सिंह, सुनील कुमार को रजत पदक देकर सम्मानित किया गया।
कांस्य पदक प्रदान कर मोहित, कुमारी हर्षिता दुबे, निशा कुमारी, निशी अंसारी, लता सिरोही, निधि सिंह, पुष्पेंद्र कश्यप, गरिमा यादव, प्रेमा भार्गव, दिया जैन, सुमित कुमार सिकरवार, अभिषेक त्यागी, रितेश तिवारी, पारिजात पंवार, राजन शर्मा, साक्षी सिंह, खुशबू, योजना गुप्ता, अंकुश मीना, महिपाल सिंह, निशी शर्मा, रितु गौतम, रेनू पटेल, बाले यग्नेश्वर, कुमारी रितु, कृष्णा, धर्मेश कुमार, क्रिशन, अमीर हमजा, फैजिया खान, हिमांशी, हर्ष अग्रवाल, अनुज कुमार, ज्योति शर्मा, धनंजय देवनाथ, नितिन लाक्रा, कुमारी श्रेया त्रिपाठी, कुमारी सना खान, उदय राम को सम्मानित किया गया।

