झुंझुनूं : श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) में शहीद हुए इकबाल खान (42) की पार्थिव देह आज (गुरुवार) झुंझुनूं लाई गई। वह जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर लालपुर गांव के रहने वाले थे।
10 हजार फीट की ऊंचाई पर ड्यूटी दे रहे इकबाल 26 अगस्त को शहीद हुए थे। झुंझुनूं शहर से लालपुर तक तिरंगा यात्रा निकाली गई। आज दोपहर करीब साढ़े बारह बजे इकबाल को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान सेना के अधिकारियों ने शहीद की 10 साल की बेटी मायरा को तिरंगा सौंपा।
2003 में सेना में भर्ती हुए थे
शहीद इकबाल खान 15 जनवरी 2003 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। वे 21 ग्रेनेडियर यूनिट में हवलदार के पद पर सेवाएं दे रहे थे।
16 साल पहले शादी हुई थी
शहीद के परिवार में उनकी मां, पत्नी नसीम बानो, बेटी मायरा और 2 भाई हैं। शहीद की शादी करीब 16 साल पहले हुई थी। इकबाल खान के पिता यासीन खान भी भारतीय सेना में हवलदार पद से रिटायर हुए थे। उनके दादा अफजल खान भी सेना में रहे थे।

सेना के शहीद हवलदार इकबाल को गुरुवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

शहीद इकबाल की पार्थिव देह देखते ही बहन रुबीना फूट-फूटकर रोने लगी।

झुंझुनूं के अग्रसेन सर्किल से पैतृक गांव लालपुर के लिए जवान इकबाल खान की पार्थिव देह के साथ तिरंगा यात्रा शुरू हुई थी।

42 साल की उम्र में शहीद हुए सेना के जवान इकबाल की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी शामिल हुए।

तिरंगा यात्रा के दौरान सड़क किनारे खड़े होकर स्कूली बच्चों ने भारत माता की जय के नारे लगाए।

पार्थिव देह लेकर आए मेजर सुनील कुमार ने शहीद इकबाल खान को श्रद्धांजलि दी।

झुंझुनूं सांसद बृजेन्द्र ओला भी झुंझुनूं के लालपुर गांव पहुंचे और श्रद्धांजलि दी।
सांसद, विधायक सहित कलेक्टर-एसपी ने दी श्रद्धांजलि
शहीद इकबाल खान की अंतिम यात्रा में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे शामिल हुए। झुंझुनूं सांसद बृजेन्द्र ओला, विधायक (पिलानी) पीतराम काला, झुंझुनूं विधायक राजेन्द्र भांबू, उदयपुरवाटी विधायक भगवानराम सैनी, अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष एमडी चोपदार, जिला कलेक्टर अरुण गर्ग, एसपी बृजेश उपाध्याय आदि ने शहीद को श्रद्धांजलि दी।

10 हजार फीट की ऊंचाई पर कर रहे थे ड्यूटी
जवान पिछले कई दिनों से दुर्गम इलाकों में करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी कर रहे थे। मेजर सुनील कुमार सिंह ने बताया कि इकबाल खान की ड्यूटी अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में थी। देश सेवा करते हुए ही उनका निधन हुआ है। उन्हें शहीद का दर्जा दिया गया है। इकबाल खान की शहादत पर पूरे इलाके को गर्व है।
26 अगस्त को हुए थे शहीद
26 अगस्त की सुबह करीब 5 बजे देश की रक्षा कर रहे लालपुर निवासी जवान इकबाल खान गश्त पर अपनी टीम के साथ एक चौकी से दूसरी चौकी की ओर बढ़ रहे थे। अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ। तुरंत डॉक्टर को बुलाने के प्रयास किए गए। इससे पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
भाई की पार्थिव देह देखकर फफक पड़ी बहन
इकबाल खान का निकाह बुड़ाना गांव की नसीम बानो से हुआ था। उनकी एक बेटी मायरा (10) है। वह 5वीं कक्षा में पढ़ती है। इधर, शहीद भाई की पार्थिव देह घर पहुंचते ही बहन रुबीना फूट-फूटकर रोने लगी।
2003 में सेना में हुए थे भर्ती
परिजनों ने बताया- इकबाल खान पुत्र यासीन खान 15 जनवरी 2003 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। वे 21 ग्रेनेडियर यूनिट में हवलदार के पद पर सेवाएं दे रहे थे।
इकबाल खान के पिता यासीन खान भी भारतीय सेना में हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके दादा अफजल खान भी सेना में रहे थे। उनके चाचा राजस्थान पुलिस में हैं।

