प्रयागराज/मथुरा : माघ मेले के दौरान संत समाज के साथ किए जा रहे कथित भेदभाव को लेकर राजनीति तेज हो गई है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में समाजवादी पार्टी खुलकर सामने आ गई है। समाजवादी पार्टी सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सचिव गौरव पांडेय ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो सरकार खुद को सनातन और धर्म की रक्षक बताती है, उसी के शासन में आज संतों की दुर्दशा हो रही है।
गौरव पांडेय ने कहा कि “महाकुंभ जैसे विराट धार्मिक आयोजन में संतों को कोई नोटिस नहीं चिपकाया गया, लेकिन माघ मेले में ऐसा क्यों किया गया? क्या संतों के लिए नियम अलग हैं और सत्ता के लिए अलग?” उन्होंने इसे दोहरे मापदंड की राजनीति करार दिया।
उन्होंने नोटिस देने वाले अधिकारियों और व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि “जिन लोगों ने संतों को नोटिस दिया है, उन्होंने न तो धर्म पढ़ा है और न ही सनातन परंपरा को समझा है। संत समाज पर आदेश थोपना भारतीय संस्कृति और आस्था का अपमान है।”
गौरव पांडेय ने 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि “आपने चुनाव हिंदू और धर्म के नाम पर जीता, लेकिन आज वही हिंदू संत अपमानित हो रहे हैं। यह सरकार की असल नीयत को उजागर करता है।” उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग मंचों से धर्म सर्वोपरि होने की बात करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
उन्होंने आगे कहा कि “आज सनातन धर्म को अगर सबसे बड़ा खतरा है, तो वह किसी बाहरी ताकत से नहीं बल्कि सत्ता में बैठे उन्हीं लोगों से है जो धर्म को केवल चुनावी हथियार बनाकर इस्तेमाल करते हैं।”
समाजवादी पार्टी नेता ने स्पष्ट किया कि पार्टी संत समाज के सम्मान, उनकी परंपराओं और धार्मिक स्वतंत्रता के साथ मजबूती से खड़ी है। “संतों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समाजवादी पार्टी सड़क से सदन तक इस मुद्दे को उठाएगी।”
गौरव पांडेय के इस बयान के बाद माघ मेले में संतों से जुड़े मुद्दे पर सियासी गर्मी और तेज हो गई है, वहीं सरकार की धार्मिक नीतियों और दावों पर विपक्ष ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

