मथुरा : बंसत पंचमी पर वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में शुक्रवार को पुजारियों ने पहले भगवान के गालों पर गुलाल लगाया। इसके बाद प्रसादी गुलाल भक्तों पर डालकर ब्रज की होली महोत्सव की शुरुआत की। इस दौरान मंदिर में भगवान के जयकारे लगे। जमकर अबीर गुलाल उड़ा। वृंदावन के मंदिरों में भक्तों का सैलाब दिखाई दिया।
सुबह 9 बजे तक ही करीब 20 हजार भक्तों ने दर्शन पूजन किया। अनुमान है कि आज करीब 1 भक्त भक्त पहुंचेंगे। ये होली उत्सव अब 40 दिनों तक जारी रहेगा। रंगनाथ मंदिर की होली के साथ इसका समापन होगा।

बांके बिहारी जी को अबीर लगाते मंदिर के पुजारी।

सेवायत मदिर के अंदर से श्रद्धालुओं पर अबीर और रंग बरसाते हुए।

सुबह 9 बजे तक करीब 20 हजार श्रद्धालुओं ने बांके बिहारी जी के दर्शन किए।

बांके बिहारी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का गेट पर माला पहनाई गई।
केसरिया मोहन भोग (हलवा) का लगाया विशेष भोग
बांके बिहारी जी मंदिर में वसंत पंचमी के दिन सबसे पहले वसंती वस्त्र आभूषण में सजे -संवरे ठाकुर बांके बिहारी जी महराज को गुलाल लगाया गया। हुरियारे स्वरूप में दर्शन दे रहे आराध्य प्रभु के सामने पंच मेवा के केसरिया मोहन भोग का विशेष भोग लगाया गया। वसंत पंचमी पर बांके बिहारी महराज को सरसों के फूलों के गुथे हुए गूंजे (माला)धारण कराए गए। वसंत आगमन के पद सुनाए गए।

अबीर उड़ते देख बांके बिहारी मंदिर में भक्त जयकारे लगाने लगे।
श्रद्धालु बोले- आज ब्रज में होली रे रसिया
वसंत पंचमी पर समूचे मंदिर परिसर को गेंदा सरसों और अन्य संदर फूलों और गुब्बारे से सजाया गया। सुगंधित इत्रों का छिड़काव किया गया। मंदिर के गर्भगृह से भक्तों पर सेवायतों ने रंग बिरंग गुलाल बरसाए। पूरा मंदिर परिसर रंग बिरंगे गुलाल से रंग गया। भगवान का प्रसादी रंग गुलाल अपने ऊपर डलवाकर श्रद्धालु आनंद से झूम उठे और गाने लगे आज ब्रज में होली रे रसिया।
सेवायत ज्ञानेंद्र गोस्वामी ने बताया- बांके बिहारी मंदिर में भगवान को अबीर लगाने के बाद से होली पर्व की शुरुआती होती है। ये परंपरा काफी दिनों से चली आ रही है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु बसंत पंचमी के दिन बांके बिहारी के दर्शन के लिए आते हैं।

