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Sat. May 16th, 2026

जिंदा जल गई मां लेकिन 4-बच्चों को बचा लिया:प्रयागराज में 2 बेटियों-भतीजे को सीढ़ी लगा दूसरी छत पर भेजा

  • मासूम को चादर में लपेटकर उछाला

प्रयागराज : प्रयागराज में बच्चों को बचाने की कोशिश में एक मां की जान चली गई। भीषण आग और धुएं के बीच वह करीब 30 मिनट तक अपने तीन बच्चों को बचाने के लिए संघर्ष करती रही। तेजी से फैल रही आग के बीच उसने एक साल के मासूम को चादर में लपेटकर छत से पड़ोसियों की ओर बढ़ाया। पड़ोसियों ने किसी तरह हाथ बढ़ाकर बच्चे को सुरक्षित बचा लिया।

इसके बाद उसने अपनी छत से गली के उस पार पड़ोसी की छत तक सीढ़ी लगाकर दो बेटियों को भी सुरक्षित बाहर निकाल दिया। हालांकि, इस दौरान वह खुद आग और धुएं के बीच फंस गई। धुएं के कारण उसका दम घुटने लगा और देखते ही देखते वह आग की चपेट में आकर जिंदा जल गई।

12 मई को प्रयागराज में एक क्रॉकरी कारोबारी के घर में लगी भीषण आग के दौरान यह दर्दनाक हादसा हुआ था। शनिवार को बच्चों को बचाते हुए जिंदा जली मां की बहादुरी का वीडियो सामने आया।

क्राकरी कारोबारी की पत्नी ने अपने एक साल के बच्चे को बालकनी से चादर के सहारे लटकाया।

क्राकरी कारोबारी की पत्नी ने अपने एक साल के बच्चे को बालकनी से चादर के सहारे लटकाया।

सीढ़ी के सहारे मां ने बेटियों को पड़ोसी के छत पर सुरक्षित भेजा।

सीढ़ी के सहारे मां ने बेटियों को पड़ोसी के छत पर सुरक्षित भेजा।

महिला ने अपने भतीजे लव को भी किसी तरह सीढ़ी से दूसरी ओर भेजा। हालांकि, खुद वह आग में फंस गई।

महिला ने अपने भतीजे लव को भी किसी तरह सीढ़ी से दूसरी ओर भेजा। हालांकि, खुद वह आग में फंस गई।

अर्चना की भाभी सरिता आग बढ़ने पर मकान की पहली मंजिल से कूद गईं। इस दौरान उनका पैर टूट गया।

अर्चना की भाभी सरिता आग बढ़ने पर मकान की पहली मंजिल से कूद गईं। इस दौरान उनका पैर टूट गया।

पूरा मामला

नैनी बाजार के चैंपियन गली में स्थित एक मकान में तीन भाइयों का परिवार रहता है। परिवार का ‘संजीवनी क्रॉकरी’ नाम से दुकान है। दुकान के सामानों को रखने के लिए घर के फर्स्ट फ्लोर पर ही गोदाम है।

12 मई की रात करीब 9 बजे शार्ट सर्किट से अचानक आग लग गई। लोग कुछ समझ पाते इसके पहले आग ने पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। चूंकि, घर की महिलाएं और बच्चे ऊपरी फ्लोर पर थे इसलिए वे फंस गए।

फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई लेकिन गली सकरी होने की वजह से रेस्क्यू में देरी हो गई। नीचे से निकलने का कोई रास्ता नहीं होने पर सभी भागकर छत पर चढ़ गए।

बच्चों को बचाने में मां ने गंवाई जान

संजीव केसरवानी की भाभी सरिता तो किसी तरह पहली मंजिल से कूद गईं लेकिन उनकी पत्नी अर्चना, तीनों बच्चे और एक भतीजा फंस गए। धुआं बढ़ता जा रहा था। आग की तपिश और लपटें छत तक आना शुरू हो गई थीं। अर्चना ने हार नहीं मानी।

उसके घर के सामने गली उस पार पड़ोसी का मकान था। छत पर पड़ोसी परिवार मदद के लिए पहुंचा था लेकिन किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था। अर्चना ने सबसे पहले अपने एक साल बच्चे को चादर में लपेटा और बच्चे को उनकी ओर उछाला।

करीब 12 फीट दूर गली उस पार छत पर पड़ोसियों ने बच्चे को पकड़ लिया। इस दौरान एक सीढ़ी मिल गई। सीढ़ी को सहारा बनाते हुए उसने अपनी 13 साल और 10 साल की बेटी को पड़ोसी की छत तक सुरक्षित भेजा। इसके बाद उसने अपने भतीजे लव को सीढ़ी से दूसरी ओर भेजा।

बच्चों को सुरक्षित करने की जद्दोजहद में आग पूरी तरह फैल चुकी थी। धुएं और आग की चपेट में अर्चना आ गई। देखते ही देखते आग की लपटों में घिरकर बुरी तरह झुलस गई। उधर, फायर ब्रिगेड की टीम भी रेस्क्यू के लिए पहुंच गई।

अर्चना की 13 साल की बेटी भी झुलसी, भाभी का पैर टूटा

आग की लपटों के बीच से अर्चना को निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। वह गंभीर रूप से झुलस चुकी थी। इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। अर्चना ने अपनी 13 साल की बेटी को सीढ़ियों के सहारे बचा लिया था लेकिन इस दौरान वह भी झुलस गई थी। उसे भी आईसीयू में भर्ती कराया गया है। जबकि छत से कूदने वाली भाभी सरिता के पैर में फ्रैक्चर हुआ है।

फायर ब्रिगेड की 12 गाड़ियों ने आग पर पाया काबू

क्रॉकरी कारोबारी के मकान में लगी आग इतनी भीषण थी कि 12 फायर ब्रिगेड गाड़ियां तड़के 4 बजे तक बुझाती रहीं। रेस्क्यू टीम के अनुसार, गली सकरी होने की वजह से आग पर काबू पाने में दिक्कतें हुई। आग के फैलने का भी डर था।

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