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बिजली संकट पर किसानों का फूटा गुस्सा: ज्ञापन देकर चेताया, मथुरा के जिम्मेदार अफसरों की कार्यशैली पर उठे सवाल

  • भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित कटौती, ट्रिपिंग, खराब ट्रांसफार्मर और सिंचाई संकट समेत सात प्रमुख मुद्दे उठाए

दैनिक उजाला, मथुरा : जनपद मथुरा के ग्रामीण क्षेत्रों में बदहाल बिजली व्यवस्था को लेकर किसानों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि किसानों को अपनी मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री तक गुहार लगानी पड़ रही है। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने मुख्यमंत्री के नाम विस्तृत ज्ञापन भेजकर बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए और ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल सुधार की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया कि जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। सरकारी रोस्टर के अनुसार गांवों में प्रतिदिन 18 से 20 घंटे बिजली आपूर्ति का प्रावधान है, लेकिन वास्तविकता यह है कि कई स्थानों पर मुश्किल से 9 से 10 घंटे ही बिजली मिल रही है। इससे खेती, सिंचाई, पशुपालन और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

किसानों ने आरोप लगाया कि निजी नलकूपों के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है। वहीं खराब एवं जले हुए ट्रांसफार्मरों को समय पर नहीं बदला जा रहा, जिससे किसानों को कई-कई दिनों तक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली लाइनों के ऊपर पेड़ों की डालियां होने के बावजूद विभाग द्वारा उनकी कटाई नहीं कराई जा रही, जिससे बरसात के मौसम में फॉल्ट और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

मुख्य अभियंता राजीव गर्ग को ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल बिजली व्यवस्था के विरोध में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के पदाधिकारी एवं किसान।

ज्ञापन में स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई गई। किसानों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद भी समय पर बिजली बिल उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। इसके कारण उपभोक्ता प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना सहित अन्य योजनाओं का समय पर लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इसके अलावा विभाग द्वारा गर्मियों में पूरे वर्ष के लिए विद्युत भार (लोड) बढ़ा दिया जाता है, जबकि अन्य समय निर्धारित लोड से अधिक उपयोग पर उपभोक्ताओं से जुर्माना वसूला जाता है। किसानों ने इस व्यवस्था को भी उपभोक्ता हितों के विपरीत बताया।

भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाई जाती रही है, लेकिन बिजली विभाग द्वारा न तो समयबद्ध कार्रवाई की जाती है और न ही शिकायतों का प्रभावी निस्तारण किया जाता है। किसानों का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी समय रहते समस्याओं का समाधान करते, तो उन्हें मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने के लिए ज्ञापन देने की नौबत नहीं आती।

किसान यूनियन ने मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, निजी नलकूपों को पर्याप्त बिजली मिले, खराब ट्रांसफार्मर तत्काल बदले जाएं, बिजली लाइनों के ऊपर झूल रही पेड़ों की डालियों की छंटाई कराई जाए, स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को समय पर बिल उपलब्ध कराया जाए तथा किसानों की सभी शिकायतों का निष्पक्ष और समयबद्ध निस्तारण किया जाए।

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो किसानों को व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए

किसानों ने चीफ इंजीनियर से पूछा कि क्या ट्रांसफार्मर बदलने के लिए पैसा लगता है, किसानों ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। मंडल प्रवक्ता गौरव तोमर, मंडल उपाध्यक्ष हरिपाल सिंह परिहार, मंडल महासचिव रमेश चंद्र, जिला उपाध्यक्ष सोनवीर ने कहा बिजली अधिकारियों की कार्यशैली से प्रदेश सरकार की छवि खराब हो रही है। बिजली अधिकारी किसानों की समस्याओं की अनदेखी कर रहे हैं।
इस दौरान मंडल वरिष्ठ उपाध्यक्ष जगदीश निषाद, प्रदेश सचिव कुंतभोज, डॉ राधेश्याम, विजयपाल सिंह, श्याम सिंह, जयपाल सिंह चौधरी, गोमती कुमारी, छतर पाल सिंह, मान सिंह उर्फ भुल्ली , रवि मुहम्मद, राजेश कुमार, प्रकाश तोमर, सत्यवीर सिंह, प्रेम सिंह, डॉ सत्यवीर, गिरवर सिंह आदि उपस्थित रहे।

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