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जीएलए में एआई से सशक्त होगी फार्मेसी शिक्षा और अनुसंधान

  • जीएलए विश्वविद्यालय के पाँच दिवसीय एफडीपी में देशभर के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और उद्योग विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

दैनिक उजाला, मथुरा: जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल रिसर्च (आईपीआर) द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का सफल समापन हुआ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन फार्मेसी एजुकेशन एंड रिसर्च विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों, सरकारी संगठनों तथा औषधि उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से फार्मेसी शिक्षा, अनुसंधान तथा स्वास्थ्य सेवाओं में आ रहे बदलावों पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम का आयोजन जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनुप कुमार गुप्ता के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम के संयोजक फार्मेसी विभाग के निदेशक प्रो. कमल शाह रहे, जबकि डॉ. योगेश मूर्ति ने आयोजन सचिव के रूप में कार्यक्रम का संचालन किया। उद्घाटन सत्र में आईपीजीए मथुरा लोकल चैप्टर के अध्यक्ष प्रो. देवेन्द्र पाठक विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन,अतिथियों के स्वागत तथा जीएलए फार्मा पल्स-वीकली न्यूज लेटर के ई-विमोचन के साथ हुआ।

आधुनिक डिजिटल तकनीकों और एआई को अपनाना होगा

पाँच दिनों तक चले इस एफडीपी में विशेषज्ञों ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि फार्मेसी शिक्षा, औषधि अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन, डिजिटल थैरेप्यूटिक्स तथा रेगुलेटरी कार्यों का अभिन्न हिस्सा बनती जा रही है। आने वाले वर्षों में फार्मासिस्टों और शोधकर्ताओं के लिए एआई आधारित कौशल अनिवार्य होंगे।

कार्यक्रम की प्रमुख वक्ता प्रो. कमला पाठक, पूर्व डीन एवं प्रोफेसर, फैकल्टी ऑफ फार्मेसी, उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, इटावा ने कहा कि फार्मेसी पेशेवरों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए आधुनिक डिजिटल तकनीकों और एआई को अपनाना होगा। वहीं प्रो. देवेन्द्र पाठक ने शिक्षा व्यवस्था को तकनीकी बदलावों के अनुरूप विकसित करने पर बल देते हुए विद्यार्थियों और शिक्षकों से नवाचारों को अपनाने का आह्वान किया।

35 से अधिक एआई टूल्स से परिचित कराया

जामिया हमदर्द, नई दिल्ली की प्रो. मायमूना अख्तर ने प्रतिभागियों को क्लॉड और जीपीटीजीरो जैसे आधुनिक एआई प्लेटफॉर्म्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के प्रो. हरीश दुरेजा ने डिजिटल थैरेप्यूटिक्स, रोबोट आधारित दवा वितरण तथा स्मार्ट स्वास्थ्य सेवाओं की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
प्रो. उर्वेश चैधरी, प्रोफेसर एवं निदेशक, गीतारत्तन इंटरनेशनल बिजनेस स्कूल, दिल्ली ने शोध एवं अकादमिक लेखन में एआई के उपयोग, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, संदर्भ प्रबंधन तथा प्लेजरिज्म जांच पर विस्तृत जानकारी देते हुए प्रतिभागियों को 35 से अधिक एआई टूल्स से परिचित कराया।

कार्यक्रम में जीएलए के कंप्यूटर इंजीनियरिंग एंड एप्लीकेशन्स विभाग के प्रो. संदीप कुमार राठौर तथा डॉ. सुमित साहा ने एआई की मूलभूत अवधारणाओं और व्यावहारिक उपयोग पर जानकारी दी। वहीं डॉ. पियूष खरे, एफएस सॉल्यूशंस लिमिटेड, ग्रेटर नोएडा तथा डॉ. नितिन कुमार जैन, साइंटिस्ट-एच, जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) भारत सरकार ने ड्रग रेगुलेटरी अफेयर्स, जैव प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों और जैव सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिए।

समापन समारोह में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रो. कमल शाह ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षकों और शोधकर्ताओं को नवीनतम तकनीकों से जोड़कर उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। वहीं डॉ. योगेश मूर्ति ने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की सफलता को सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया। कार्यक्रम में देशभर से आए शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने यह सिद्ध किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य में फार्मेसी शिक्षा और अनुसंधान की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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