- अत्याधुनिक लैब, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, 20 लाख तक का पैकेज और विश्वस्तरीय रिसर्च से विद्यार्थियों को मिल रही नई पहचान
दैनिक उजाला, मथुरा: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, 5जी-6जी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और एम्बेडेड सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के तेजी से विस्तार के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ईसीई) भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग शाखाओं में शामिल हो चुकी है। ऐसे समय में जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा का इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग विद्यार्थियों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बना रहा है।
जीएलए विश्वविद्यालय का ईसीई विभाग केवल क्लास रूम तक सीमित शिक्षा नहीं देता, बल्कि विद्यार्थियों को अत्याधुनिक तकनीकों, उद्योग आधारित प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक अवसरों से जोड़ते हुए उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करता है। यही कारण है कि यहां के विद्यार्थी देश की अग्रणी सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों में लगातार चयनित हो रहे हैं।
विभाग का प्लेसमेंट रिकॉर्ड भी लगातार मजबूत होता जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में विद्यार्थियों का चयन कोर कंपनी सिलिकॉन लैब्स, एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स, इंटेल, क्वालकॉम, यूनो मिण्डा, वीवीडीएन एवं सॉफ्टवेयर कंपनी विप्रो, इंफोसिस, कॉग्निजेंट और टेक महिंद्रा आदि जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में हुआ है। विद्यार्थियों को 6 लाख रुपये से लेकर 20 लाख रुपये वार्षिक तक के आकर्षक पैकेज प्राप्त हुए हैं, जो विभाग में मिलने वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और तकनीकी दक्षता का प्रमाण हैं।
व्यावहारिक शिक्षा को प्राथमिकता
व्यावहारिक शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए विभाग में वीएलएसआई लैब, एम्बेडेड सिस्टम लैब, इंटरनेट ऑफ थिंग्स लैब, रोबोटिक्स लैब, पीसीबी डिजाइन लैब, एडवांस्ड कम्युनिकेशन लैब तथा नेशनल इंस्ट्रूमेंट्स द्वारा समर्थित आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। इन लैब्स में विद्यार्थी लैबव्यू, वीएलएसआई डिजाइन टूल्स और एम्बेडेड प्लेटफॉर्म पर वास्तविक प्रोजेक्ट विकसित करते हैं, जिससे वे उद्योग में कार्य करने के लिए पहले दिन से तैयार रहते हैं। वर्तमान समय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभाग के पाठ्यक्रम को भी आधुनिक बनाया गया है। विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, सेमीकंडक्टर डिजाइन, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सेंसर इंटीग्रेशन और इंडस्ट्री 4.0 जैसी तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे विद्यार्थी केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि नई तकनीकों के विकास और नवाचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार होते हैं।
वैश्विक स्तर पर विद्यार्थियों को अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभाग ने अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों एवं उद्योगों के साथ सहयोग स्थापित किया है। सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी, मोहाली, सिलिकॉन लैब्स, विल्नियस गेडिमिनस टेक्निकल यूनिवर्सिटी, लिथुआनिया तथा नेशनल इंस्ट्रूमेंट्स के साथ हुए सहयोग के माध्यम से विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, रिसर्च, फैकल्टी इंटरैक्शन, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के एचओडी प्रो. विनय कुमार देवलिया ने कहा कि आज पूरी दुनिया सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और स्मार्ट कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी की ओर तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समय में हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि उन्हें भविष्य की तकनीकों का विशेषज्ञ बनाना है। विभाग में उद्योग आधारित पाठ्यक्रम, आधुनिक प्रयोगशालाएं, अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक सहयोग के माध्यम से विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण दिया जा रहा है, जिससे वे देश और दुनिया की अग्रणी कंपनियों में सफल करियर बना सकें।

