- फरह ब्लाॅक ग्राम बरौदा मसरकपुर का मामला, खाद्य विभाग ने बिना जांच के ही परिवार को कर दिया विस्थापित
मथुरा/फरह : खाद्य विभाग द्वारा आए दिन कोई न कोई नया कारनामा देखने को मिलता है। इसका मुख्य कारण है कि जांच का ठीक से न होना और स्वयं ही निर्णय ले लेना। विभागीय अधिकारियों की ऐसी लापरवाही फरह क्षेत्र के ग्राम बरौदा मसरकपुर में देखने को मिली है। यहां रहने वाले एक परिवार में मृतक महिला का नाम हटाने की बजाय उसके पति और बच्चों के नाम परिवार विस्थापित का कारण दिखाकर राशन कार्ड से काट दिए हैं।
फरह ब्लाॅक के ग्राम बरौदा निवासी लाखन सिंह कहते हैं कि उनकी पत्नी दिव्या की मौत एक बीमारी के कारण वर्ष 2018 में हो गई थी। जिसका मृत्यु प्रमाण पत्र भी ग्राम पंचायत से जारी हो चुका है। इस संबंध में ग्राम डीलर खडग सिंह को भी जानकारी दी गई कि मृत पत्नी के नाम को हटाकर मेरी दूसरी पत्नी सपना के नाम को जोड़ दिया जाय। उन्होंने इस संबंध में आधार कार्ड भी लिए, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। इस वर्ष में मार्च माह तक का मुझे राशन मिला। अप्रैल माह का राशन लेने के लिए जब वह गए तो राशन डीलर ने कहा कि आपकी कोई यूनिट नहीं है। आपकी मृत पत्नी का नाम रह गया है। यह सुनकर वह चैंक गए कि मृत पत्नी का नाम हटना चाहिए, लेकिन हमारा नाम कैसे हट गया। जबकि राशन कार्ड पहले से ही उनकी मृत पत्नी, बेटी प्रियंका और वह स्वयं थे।

अधिकारियों की यह रही लापरवाही
खाद्य पूर्ति अधिकारियों की लापरवाही में कोई कमी नहीं दिख रही है। उन्हांेने बिना जांच किए ही पूरे परिवार को विस्थापित कर दिया और राशन कार्ड से मृत महिला के बजाय जीवित व्यक्तियों के नाम विस्थापित कारण दिखाकर काट दिए।
दो में से एक बेटी का ले रहे थे राशन
बड़ी बेटी के आधार कार्ड में काफी समय से दिक्कत होने कारण लाखन सिंह राशन कार्ड में अंकित अपनी छोटी बेटी का राशन ले रहे थे, उन्होंने कईयों बार बड़ी बेटी का नाम अंकित कराने के लिए डीलर को कहा, लेकिन यह भी नहीं हुआ।
क्या है लाखन सिंह की मांग
परिवार के मुखिया लाखन सिंह कहते हैं कि राशन कार्ड सं0 214540506871 उनकी मृत पत्नी के नाम को हटाकर उनकी दूसरी पत्नी सपना के नाम को जोड़ा जाय और उनकी तीनों बेटियों के नाम को जोड़कर राशन प्रक्रिया शुरू की जाय, जिससे कि परिवार में खाद्य आपूर्ति बनी रहे।
अधिकारियों और कार्यालय के बारे में जानकारी नहीं
लाखन सिंह कहते हैं कि अगर कार्यालय में भी शिकायत की जाय तो उन्हें न तो किसी अधिकारी की जानकारी है कि वहां शिकायत की जाय। अधिकारी का कोई फोन नंबर भी नहीं है। कार्यालय की पता नहीं है, आखिर इतनी दूर से कैसे जाया जाय मथुरा और कहां घूमें कुछ जानकारी मिले तो न।

