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Wed. Mar 4th, 2026

बागेश्वर धाम पं.धीरेंद्र शास्त्री के पोस्टर पर पोती कालिख, लिखे गंदे शब्द

छतरपुर : मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हनुमत कथा बिहार के पटना जिले में चल रही थी, 17 मई को कथा का अंतिम दिन होने के कारण लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचने वाले हैं, ऐसे में किसी ने मुख्य चौराहे पर लखे पोस्टरों पर कालिख पोतकर विरोध दर्शाया है।

बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पोस्टरों पर लोगों ने कालिख पोतकर अपशब्द लिखे हैं, ये हरकत रात के अंधेरे में की गई है, ऐसे में जब बुधवार को कथा के अंतिम दिन लोगों ने सुबह-सुबह ये पोस्टर देखे तो उन्होंने भी आपत्ति जताई है। हालांकि इस पर अभी तक पंडित धीरेंद्र शास्त्री का कोई बयान सामने नहीं आया है।

ये हरकत लोगों द्वारा पटना में डाकबंगला चौराहे पर लगाए गए पोस्टरों के साथ की है, ये पोस्टर बाबा बागेश्वर धाम के स्वागत के लिए लगाए गए थे, जिस पर कालिख पोतने के साथ ही अपशब्द लिखे गए हैं। बताया जा रहा है कि ऐसा किसी ने स्प्रे कलर के माध्यम से किया है, चूंकि ये बड़ा मामला है, ऐसे में पुलिस जांच में जुट गई है। शीघ्र ही कालिख पोतने वाले सामने आ जाएंगे।

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा पटना जिले के नौबतपुर के तरेत पाली मठ परिसर में चल रही है, पंडित धीरेंद्र शास्त्री का 15 मई को दिव्य दरबार लगना था, लेकिन भारी जन सैलाब उमडऩे के कारण उन्होंने दरबार को कैंसिल कर दिया, ताकि किसी को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़े, ऐसा इसलिए किया गया था, क्योंकि कथा में जमकर जनसैलाब उमड़ पड़ा, ऊपर से गर्मी अधिक होने के कारण श्रद्धालुओं की तबियत भी बिगडऩे लगी थी, चूंकि दरबार में और भी अधिक संख्या में श्रद्धालु पहुंचने की संभावना थी, ऐसे में किसी प्रकार की विपरित परिस्थति नहीं बने, इस कारण 15 मई को लगने वाला दरबार कैंसिल कर दिया गया, खुद पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि अगली बार जब बिहार आउंगा तब दरबार लगाएंगे, उन्होंने गर्मी होने के कारण श्रद्धालुओं से भी घर बैठकर ही टीवी आदि माध्यमों से कथा सुनने का आग्रह किया, बताया जा रहा है कि इसी बीच 16 मई को देर रात उन्होंने दरबार लगाया था, जिसमें लोगों ने अर्जी भी लगाई और भभूति भी बांटी गई, कथा से पहले वे महावीर मंदिर बजरंग बली के दर्शन करने के लिए भी पहुंचे, उन्होंने कथा के दौरान यह भी कहा कि वे श्रद्धालुओं को सनातन धर्म से जुड़े रहने और हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए प्रेरित करने आए हैं, उनका कहना था कि इसके लिए वे अपनी जान भी दांव पर लगाकर आएं हैं।

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