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जीएलए में जुटेंगे देशभर के युवा टेक्नोक्रेट, 48 घंटे कोडिंग से तलाशेंगे भविष्य के समाधान

  • 29 से 31 अक्टूबर तक होगा डेवियाथॉन 2.0, ₹5 लाख से अधिक का प्राइज पूल विजेताओं को इंटर्नशिप और पीपीओ का भी मौका

मथुरा : तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में विद्यार्थियों को नई संभावनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा में राष्ट्रीय स्तर के हैकाथॉन डेवियाथॉन 2.0 का आयोजन किया जा रहा है। 29 से 31 अक्टूबर तक चलने वाले इस 48 घंटे के ऑफलाइन हैकाथॉन में देशभर से विद्यार्थी और युवा टेक्नोलॉजी उत्साही हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के मुख्य अथिति मेरिडियन कंपनी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर शंकर कम्बम होंगे।

आयोजकों के अनुसार प्रतियोगिता में ₹5 लाख से अधिक का प्राइज पूल रखा गया है। इसके साथ ही प्रतिभागियों को इंटर्नशिप और प्री-प्लेसमेंट ऑफर हासिल करने के अवसर भी मिलेंगे। कार्यक्रम में एआई फ्रंटियर, टेक फॉर इम्पैक्ट, मिशन भारत और डिजिटल ओडिसी जैसी थीम के तहत प्रतिभागी तकनीकी समाधान विकसित करेंगे।

डेवियाथॉन 2.0 में प्रतिभागियों को 48 घंटे तक अपनी टीम के साथ काम करते हुए विभिन्न समस्या क्षेत्रों पर तकनीकी समाधान तैयार करने होंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए तकनीक और नवाचार का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

आइईटी के डीन प्रो. अशोक भंसाली ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए तैयार करना भी है। हैकाथॉन जैसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक सोच, तकनीकी दक्षता और टीमवर्क को एक साथ प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तेजी से विकसित हो रही नई तकनीकों के दौर में विद्यार्थियों का इंडस्ट्री की वास्तविक चुनौतियों से जुड़ना बेहद महत्वपूर्ण है। डेवियाथॉन 2.0 के माध्यम से विद्यार्थियों को नई तकनीकों पर प्रयोग करने, नवाचार करने और अपने विचारों को काम करने वाले प्रोटोटाइप में बदलने का अवसर मिलेगा। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के लिए भी तैयार करते हैं।

हैकाथॉन में एआई फ्रंटियर के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान, टेक फॉर इम्पैक्ट के तहत सामाजिक प्रभाव वाले तकनीकी मॉडल, मिशन भारत के तहत देश की जरूरतों से जुड़े समाधान और डिजिटल ओडिसी के अंतर्गत भविष्य की डिजिटल तकनीकों पर काम किया जाएगा।

विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को लेक्चर रूम में सीखे ज्ञान को वास्तविक समस्याओं पर लागू करने और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप अपनी क्षमताएं विकसित करने का अवसर देगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों के लिए पुरस्कार के साथ-साथ इंटर्नशिप और पीपीओ के अवसर भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

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