मथुरा : संस्कृति विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशों के तहत ‘निवारक सतर्कता अभियान-2026’ की शुरुआत की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य संस्थागत प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में नैतिक सुशासन को सुदृढ़ करने के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों—लंबित शिकायतों का निस्तारण, कानूनी मामलों का समाधान और पारदर्शी संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) प्रबंधन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है।
एक कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के असिस्टेंट रजिस्ट्रार मनीष जी ने जानकारी देते हुए बताया कि विद्यार्थियों, कर्मचारियों और अन्य हितधारकों की शिकायतों को समयबद्ध तरीके से निपटाने के लिए एक प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली लागू की गई है। इसके तहत सभी शिकायतों का विधिवत पंजीकरण कर निष्पक्ष और गोपनीय जांच सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही, न्यायालयों और वैधानिक प्राधिकरणों के समक्ष लंबित कानूनी मामलों की नियमित समीक्षा करने और समय-सीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के लिए एक विशेष विधि प्रकोष्ठ (लीगल सेल) को सक्रिय किया गया है।
प्रशासनिक सुधारों की इस कड़ी में संविदा प्रबंधन को भी अत्यधिक पारदर्शी बनाया गया है। खरीद प्रक्रियाओं, निविदा आमंत्रणों और विक्रेताओं के चयन में पूर्ण निष्पक्षता बरती जाएगी। वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए सामान और सेवाओं की समय पर आपूर्ति तथा नियमों के सत्यापन के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पूरे अभियान की निगरानी के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्णय लिया है, जो सभी विभागों से समन्वय स्थापित कर सुधारात्मक कार्यों की प्रगति रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारियों को सौंपेंगे। विश्वविद्यालय का मानना है कि इन उपायों से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक संवेदनशील, कुशल और जवाबदेह बनेगी।
कार्यक्रम में संस्कृति स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड बिज़नेस मैनेजमेंट के डीन डा. गंगाधर हुगर भी मौजूद रहे।

