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मथुरा के SE देहात के सामने बलदेव के JE की मनमानी! जिस ग्रुप में थी शिकायतों के समाधान की व्यवस्था, उसी से 3 दिन पहले बाहर

  • मथुरा के SE देहात को ठेंगा दिखाते बलदेव विद्युत उपकेंद्र के JE?

दैनिक उजाला, बलदेव : विद्युत उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान और विभागीय अधिकारियों के बीच समन्वय के लिए एक्सईएन द्वारा काफी समय पहले बनाए गए व्हाट्सऐप ग्रुप से बलदेव के जेई के बाहर निकलने का मामला चर्चा में है। इस ग्रुप में एसई देहात, एक्सईएन, एसडीओ बलदेव, जेई और संबंधित लाइनमैन जुड़े हुए थे। ऐसे में उच्चाधिकारियों की मौजूदगी वाले इस समस्या समाधान ग्रुप से ही जेई का बाहर हो जाना विभागीय कार्यप्रणाली और अनुशासन पर सवाल खड़े कर रहा है।

बताया गया है कि बीते दिन बलदेव के जेई ने इस ग्रुप को छोड़ दिया। इसके साथ ही संबंधित लाइनमैन ने भी ग्रुप से लेफ्ट मार दी। यह कोई सामान्य ग्रुप नहीं था, बल्कि क्षेत्र की विद्युत समस्याओं को अधिकारियों तक पहुंचाने, फॉल्ट और आपूर्ति संबंधी मामलों की जानकारी साझा करने तथा उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए एक्सईएन द्वारा बनाया गया था।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस व्यवस्था को विभाग के एक्सईएन ने समस्या समाधान और अधिकारियों के बीच समन्वय के लिए बनाया था, उसी से क्षेत्र का जिम्मेदार जेई बाहर हो गया। खास बात यह है कि ग्रुप में एसई देहात जैसे उच्चाधिकारी भी मौजूद थे। ऐसे में एसई के सामने ही जेई का ग्रुप छोड़ना विभागीय अनुशासन और उच्चाधिकारियों के निर्देशों की गंभीरता को लेकर सवाल खड़े करता है।

जब उच्चाधिकारी की मौजूदगी में ही कोई अधीनस्थ अधिकारी समस्या समाधान के लिए बनाए गए विभागीय समन्वय ग्रुप से बाहर हो जाए, तो आम उपभोक्ता के सामने भी सवाल खड़ा होता है कि उसकी बिजली संबंधी शिकायत आखिर किसके माध्यम से और किस स्तर पर सुनी जाएगी। बलदेव में बिजली आपूर्ति, फॉल्ट, लो-वोल्टेज और अन्य समस्याओं को लेकर उपभोक्ताओं को पहले से शिकायतें रहती हैं। ऐसे में फील्ड अधिकारी और उच्चाधिकारियों के बीच सीधा समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है।

जेई के साथ संबंधित लाइनमैन के भी ग्रुप छोड़ने से मामला और गंभीर हो गया है। अब सवाल यह भी है कि क्या विभागीय अधिकारियों के बीच बना यह समन्वय तंत्र केवल औपचारिकता बनकर रह गया है या फिर उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि संबंधित जेई पूर्व में जिन स्थानों पर तैनात रहे हैं, वहां भी उनके कार्यकाल को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। हालांकि पूर्व के मामलों की वास्तविक स्थिति और उन पर विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी पुष्टि विभागीय अधिकारियों के स्तर से ही हो सकेगी।

अब पूरे मामले में एसई देहात की भूमिका पर निगाहें टिक गई हैं। सवाल यह है कि एक्सईएन द्वारा बनाए गए समस्या समाधान ग्रुप को छोड़ने के मामले में क्या एसई देहात संज्ञान लेते हैं और क्या जेई से इसका कारण पूछा जाएगा? क्योंकि यदि विभागीय व्यवस्था में उच्चाधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी ही समन्वय व्यवस्था से बाहर हो जाए, तो सबसे बड़ा सवाल आखिर उपभोक्ताओं की शिकायतों और उनकी सुनवाई पर ही खड़ा होता है।

समस्याओं को सुनने से दूर भाग रहे JE

बलदेव विकास समिति के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र पांडेय कहते हैं कि पूर्व में भी JE रहे अशोक, महेश आदि का उपभोक्ताओं से जुड़ाव था, देर रात्रि तक समस्याओं को उपकेंद्र पर रहकर सुनते थे। लेकिन अब JE के सुनने की बात चल रही है कि वो समस्याओं को सुनने से दूर भाग रहे हैं। फील्ड में कभी देखा नहीं, शाम होते ही भागने की मचती है।

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