नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी तनाव से बढ़ती महंगाई के बावजूद भारत की इकोनॉमी RBI के अनुमान से ज्यादा मजबूत रही।
GDP इस साल की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में 7.8% रही। RBI का अनुमान 7% था। एक साल पहले की इसी तिमाही में यह 6.9% की दर से बढ़ी थी।
बैंकिंग/फाइनेंस, रियल एस्टेट, आईटी और अन्य बिजनेस सर्विसेज सेक्टर में 10% से ज्यादा की बढ़त रही। इससे महंगाई का असर GDP ग्रोथ पर नहीं पड़ा।
सोमवार को यह आंकड़े केंद्र सरकार के सांख्यिकी विभाग ने जारी किए।
कैसे की जाती है जीडीपी की गिनती?
जीडीपी निकालने के लिए एक खास फॉर्मूले का इस्तेमाल होता है:
$GDP = C + G + I + NX$
C (कंजम्प्शन): यानी हम और आप जो अपनी जरूरतों पर खर्च करते हैं।
G (गवर्नमेंट): सरकार द्वारा देश के विकास और सुविधाओं पर किया गया खर्च।
I (इन्वेस्टमेंट): कंपनियों द्वारा बिजनेस को बढ़ाने के लिए किया गया निवेश।
NX (नेट एक्सपोर्ट): दूसरे देशों को बेचे गए सामान में से खरीदे गए सामान को घटाना।
दो तरह की GDP: रियल और नॉमिनल
रियल जीडीपी: इसमें सामान और सेवाओं की कीमत बेस से तय की जाती है। अभी तक इसका साल 2011-12 था। इससे पता चलता है कि देश में उत्पादन सच में बढ़ा है या नहीं।
नॉमिनल जीडीपी: यह मौजूदा बाजार भाव पर आधारित होती है। इसमें महंगाई भी शामिल होती है। अगर चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, तो नॉमिनल जीडीपी भी बढ़ी हुई दिखेगी।
इकोनॉमी की सेहत बताती है GDP
GDP यानी देश के भीतर एक तय समय में कितनी वैल्यू का सामान बना और कितनी सर्विसेज दी गईं। इसे देश की आर्थिक सेहत का ‘रिपोर्ट कार्ड’ भी कह सकते हैं। इसमें भारतीय कंपनियां ही नहीं, बल्कि देश में काम करने वाली विदेशी कंपनियों का प्रोडक्शन भी जोड़ा जाता है।

