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450 रुपये किलो मिल रही LPG! रोजगार छोड़ बिहार लौट रहे मजदूर; बोले- भूखे मरते या…

गया : बिहार के अधिकांश रेलवे स्टेशनों पर इन दिनों वैसी ही भीड़ और बेबसी दिख रही है, जैसी 2020 में कोरोना महामारी के दौरान देखी गई थी। दिल्ली, मुंबई, सूरत और वडोदरा जैसे शहरों से आने वाली ट्रेनें खचाखच भरी हुई हैं, जिनमें सवार होकर सैकड़ों प्रवासी मजदूर अपना रोजगार छोड़कर वापस लौट रहे हैं। वजह है ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के कारण पैदा हुआ एलपीजी (LPG) क्राइसिस।

450 रुपये किलो गैस, भूखे मरते या घर लौटते

गुजरात और दिल्ली से गया जी रेलवे स्टेशन पर पहुंचे मजदूरों ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या खाना बनाने की हो गई थी। गया जी जंक्शन पर दिल्ली से लौटे कामगार कमलेश कुमार ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि वहां गैस की भारी किल्लत है। कमलेश के अनुसार, “गैस मिल तो रही है, लेकिन 350 रुपये से 450 रुपये प्रति किलो के भाव से ब्लैक में रिफिल की जा रही है। इतनी महंगी गैस खरीदकर खाना बनाना हमारे बस की बात नहीं थी, इसलिए मजबूरी में घर लौटना पड़ा।”

लकड़ी पर बना रहे थे खाना

गुजरात के सूरत (उधना स्टेशन) से लौटे एक दिहाड़ी मजदूर ने बताया कि वहां गैस न मिलने के कारण वे लकड़ियों पर खाना बनाने को मजबूर थे, काम भी नहीं मिल रहा था इसीलिए घर वापस लौटना पड़ा।

वडोदरा से लौटे कारु यादव का दर्द भी कुछ ऐसा ही है। उन्होंने कहा, ‘वहां सबसे ज्यादा दिक्कत यही हो रही थी कि गैस नहीं मिल रही थी। हमारा फैक्ट्री मालिक पैसे तो दे रहा था, लेकिन जब बाजार में गैस ही नहीं है तो मालिक भी क्या करे? खाने के लाले पड़ गए थे, इसलिए वडोदरा छोड़ना ही बेहतर समझा।”

होटल का खाना भी हुआ नामुमकिन

सूरत से पहुंचे एक अन्य युवक ने बताया कि पिछले 15 दिनों से गैस नहीं मिल रही थी। कुछ दिन किसी तरह तो काम चला, तीन-चार दिन तो होटल में खाना खाया, लेकिन एक मजदूर कब तक होटल का खर्च उठा सकता है? तो वापस लौट आए। लेकिन यहां आने में भी बहुत परेशानी हुई, ट्रेन में पैर रखने की जगह नहीं थी, हम लोग जानवरों की तरह लदकर किसी तरह घर पहुंचे हैं।

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