- गुजरात के वलसाड जिले के वापी में एक सांप की जान सीपीआर देकर बचाई गई है, जिस शख्स ने सीपीआर दिया है, उसे 24 घंटे के ऑब्जर्वेशन में रखा जा रहा है
वलसाड: गुजरात के वलसाड जिले के वापी में एक सर्प मित्र ने सीपीआर देकर एक सांप की जान बचाई है। सांप एक टंकी के अंदर केमिकल होने की वजह से अंतिम सांसें ले रहा था, इसी दौरान सर्प मित्र मौके पर पहुंचे और सांप को रेस्क्यू किया। सांप बिन झेरी (रेड स्नेक ) बताया जा रहा है।
सांप को ऑब्जरबेशन में रखा गया
बिन झेरी सांप को CPR देने के बाद सांप को ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। सांप को सीपीआर देने वाले सर्प मित्र का नाम संजय पवार है। CPR देने के कारण यह सांप जंगल इलाके में घूमता रहता है और उनकी खुराक भी जंगली प्राणी ही रहती है, इसके कारण स्नेक स्कैचर संजय पवार को भी 24 घंटे के लिए ऑब्जर्वेशन में रहना पड़ेगा।
पांच फीट है सांप की लंबाई
वापी जीआईडीसी के फस्ट फेज में आई IGCL कंपनी के ईटीपी प्लांट में पांच फीट जितना लंबा सांप देखा गया जिसे रेस्क्यू करने के लिए वापी के स्नेक स्केचर संजय पवार का संपर्क करा गया।
स्नेक स्कैचर संजय पवार घटनास्थल पर पहुंचे और सांप को रेस्क्यू किया। सांप को ईटीपी की टंकी के बाहर निकाला गया तो पाया कि सांप आखिरी सांस ले रहा था। तभी स्नेक स्कैचर ने अपनी सूझबूझ से कृत्रिम सांस देना आरंभ किया।
IGCL कंपनी के ईटीपी की टंकी में केमिकल होने के कारण सांप अपनी अंतिम सांसे गिन रहा था, तभी वापी और वलसाड जिले में कई सालों से स्नेक स्कैचर का कार्य करते संजय पवार ने अपनी जान की परवाह न करते हुए सांप को CPR देना आरंभ किया।
CPR देने के बाद सांप की जान बची और उस सांप को ऑब्जर्वेशन में रखा गया है और ठीक हो जाने के बाद उसे वन विभाग के साथ मिलकर सुरक्षित छोड़ा जाएगा। जिस स्नेक स्कैचर संजय पवार ने CPR देकर सांप की जान बचाई है लेकिन खुद को भी ट्रीटमेंट करानी पड़ेगी, 24 घंटे वह भी ऑब्जर्वेशन में रहेंगे।
इस मामले के सामने आने के बाद सर्प मिश्र के काम की तारीफ हो रही है कि उन्होंने एक सांप की जान बचाई है। गौरतलब है कि सांप का नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं, ऐसे में सांप को सीपीआर देना खतरनाक काम है। इससे पहले एक शख्स ने खतरनाक सांप रसेल वाइपर को अपने मुंह से CPR दिया था और उसकी जान बचाई थी।

