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सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते गोस्वामी गाने लगीं ‘बधाई गीत’:बोलीं- ठाकुरजी ने हमें अपने पास रखा, अब यूपी सरकार की ट्रस्ट पर रोक लगी

वृंदावन : उत्तर प्रदेश सरकार के मंदिर प्रबंधन को लेकर लंबे समय से जिन गोस्वामी परिवार की महिलाएं कॉरिडोर प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थीं, वह ठाकुरजी की तरफ देखते हुए बधाई गीत गाने लगती हैं। माहौल भक्तिमय पहले से था, अब लोग भावुक नजर आने लगते हैं।

जो भक्त मंदिर में पहुंच रहे थे, वह बदले हुए दृश्य का कारण जानने का प्रयास करने लगते हैं, महिलाएं हंसते हुए कहती हैं- जो हमारे ठाकुरजी को परेशान करना चाहते थे, उनकी हार हुई। ठाकुरजी ने हमें अपने पास रखा। जय हो बिहारीजी की।

बधाई गीत गाती हैं- मेरे ठाकुरजी की फूल गई फुलवाड़ी…। गोस्वामी परिवार की महिलाओं के साथ भक्त भी शामिल हो जाते हैं। अब कोर्ट ने ऐसा क्या आदेश दिया? इसका क्या असर होगा?

दरअसल, बांके बिहारी मंदिर में 72 दिनों से गोस्वामी परिवार और उनकी महिलाओं का प्रदर्शन चल रहा था, शुक्रवार को भी महिलाएं मंदिर के एक कोने में बैठकर कॉरिडोर प्रोजेक्ट और यूपी सरकार के मंदिर प्रबंधन के लिए बनाए जा रहे ट्रस्ट का विरोध कर रही थी।

दूसरी तरफ, 8 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में इन मामलों में सुनवाई चल रही थी। कोर्ट में वृंदावन के लोगों की तरफ से दर्ज 4 याचिकाओं पर जिरह चल रही थी।

कोर्ट ने कहा- बांके बिहारी मंदिर न्यास अध्यादेश, 2025 के तहत समिति के संचालन को सस्पेंड किया जा रहा है। कोर्ट ने अध्यादेश की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट ट्रांसफर किया है। कोर्ट ने बांके बिहारी ट्रस्ट पर अस्थाई रोक लगा दी।

दरअसल, 15 मई को सुप्रीम कोर्ट ने दो बड़े आदेश दिए थे:

पहला- यूपी सरकार मंदिर के फंड का इस्तेमाल कर सकेगी, ताकि बांके बिहारी कॉरिडोर को विकसित किया जा सके।

दूसरा- मंदिर के आसपास की 5 एकड़ भूमि अधिग्रहण करने की अनुमति दी। शर्त यह थी कि अधिग्रहित भूमि ठाकुरजी के नाम पर पंजीकृत होगी।

सुप्रीम कोर्ट में नए सिरे से दाखिल 4 याचिका पर शुक्रवार को चौथी सुनवाई हुई है।

सुप्रीम कोर्ट में नए सिरे से दाखिल 4 याचिका पर शुक्रवार को चौथी सुनवाई हुई है।

वृंदावन के लोगों ने 4 याचिकाएं कोर्ट में दाखिल कीं

इसके बाद 26 मई को यूपी सरकार ने अध्यादेश- 2025 जारी किया। इसमें मंदिर की देखभाल के लिए ट्रस्ट (न्यास) बनाने की व्यवस्था की गई। इसमें मंदिर का प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की जिम्मेदारी ‘श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास’ द्वारा संभाली जानी थी। इसमें 11 सदस्य मनोनीत होने थे, जबकि 7 सदस्य पदेन हो सकते हैं।

इसके खिलाफ 27 मई को वृंदावन के देवेंद्र गोस्वामी, सोहन मिश्रा, रजत गोस्वामी और व्यापारियों की तरफ से 4 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गईं।

चौथी सुनवाई में कोर्ट ने गोस्वामियों के पक्ष में स्टेटमेंट दिया

कोर्ट में 1-1 करके 3 सुनवाई हुई। 8 अगस्त को चौथी सुनवाई चल रही थी। गोस्वामी की तरफ से जिरह कर रहे एडवोकेट एनके गोस्वामी ने बताया- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक हाईकोर्ट इस मामले पर फैसला नहीं ले लेता, तब तक समिति को स्थगित रखा जाएगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस बीच मंदिर की सुचारू व्यवस्था के लिए एक और समिति का गठन किया जाएगा। जिसकी अध्यक्षता हाईकोर्ट के एक पूर्व जज करेंगे। समिति में कुछ सरकारी अधिकारी और गोस्वामियों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे, जो मंदिर के पारंपरिक संरक्षक ही होंगे।

कॉरिडोर यमुना पार बना लें

हम ये लगातार साबित कर रहे है कि बांके बिहारी एक प्राइवेट मंदिर है। किसी भी तरीके से इसका अधिग्रहण स्वीकार नहीं होगा। सरकार हर हाल में मंदिर के फंड को इस्तेमाल करना चाहती है, ये गलत है। कॉरिडोर को लेकर इतनी जल्दबाजी क्या है? हमारा सुझाव है कि अगर कॉरिडोर बनाना है, तो यमुना के पार बनाएं। जो खाली स्थान पड़े हुए हैं, वहां बना लें।

धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने कहा- आज तो पूरे वृंदावन में खुशियां मनाई जा रही हैं।

धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने कहा- आज तो पूरे वृंदावन में खुशियां मनाई जा रही हैं।

ये गोस्वामी परिवार की महिलाओं की जीत

श्री नाथ गोस्वामी कहते हैं- ये बहुत अच्छा हुआ है कि केस इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया है। यूपी सरकार के अध्यादेश पर जो अस्थाई रोक लगी है, उससे बहुत मदद होगी। गोस्वामी परिवार की महिलाएं 72 दिन से मंदिर में हर रोज प्रदर्शन कर रही थी, ये उनकी जीत हुई है। आज का दिन बहुत बड़ा है, यह सब ठाकुरजी की इच्छा से ही तो हो रहा है। कोई उनके स्थान को कैसे ले सकता है।

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