वाराणसी : वाराणसी में पितरों का तर्पण करने हजारों लोग पहुंच रहे हैं। शनिवार को अमेरिका से जैक्सन अपने दिवंगत चाचा नेट की अस्थियां लेकर वाराणसी पहुंचे। यहां अस्सी घाट पर उन्होंने चाचा की आत्मा की शांति के लिए विधि-विधान से अस्थि विसर्जन और पिंडदान कराया।
धार्मिक अनुष्ठान के दौरान जैक्सन भावुक दिखे। उन्होंने बताया कि मैं बचपन से अपने चाचा नेट के साथ रहा हूं। मेरा अपने चाचा से गहरा जुड़ाव था। निधन के बाद भी मैं चाचा को याद करता रहता हूं। वह अक्सर रात में मेरे सपने में आते थे। चाचा के बार-बार दिखाई देने से मैं परेशान रहने लगा।
मैंने इसका समाधान तलाशना शुरू किया। इसी दौरान मैंने काशी और यहां होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ा एक वीडियो देखा। इसमें काशी की धार्मिक मान्यताओं और अस्थि विसर्जन-पिंडदान की जानकारी मिली। इसके बाद मैंने चाचा की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए खुद काशी आने का फैसला किया।
काशी में अपने पितरों का तर्पण करने हर रोज 50 हजार श्रद्धालु गंगा घाट और पिशाचमोचन कुंड पहुंच रहे हैं। 7 दिनों में अब तक करीब 3 लाख से अधिक लोग अपने पूर्वजों का तर्पण कर चुके हैं। इसमें विदेश से आने वाले लोग भी शामिल हैं।

शनिवार को जैक्शन काशी पहुंचे। यहां अस्सी घाट पर अपने चाचा का तर्पण किया।
चाचा रोज सपने में आते थे, इसलिए मैं काशी आया
अमेरिका के मिशिगन प्रांत के रहने वाले जैक्सन ने बताया कि मैं एक रेस्टोरेंट में काम करता हूं। मैं अपने चाचा नेट के साथ रहता था। मेरे चाचा भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी आस्था रखते थे। वह भारत के धार्मिक शहरों के बारे में रुचि रखते थे। काशी और मथुरा के प्रति उनकी आस्था थी। उनकी अंतिम इच्छा थी कि उनकी अस्थियों को मोक्षदायिनी गंगा में विसर्जित किया जाए।
3 साल पहले 50 साल की उम्र में उनकी डेथ हो गई। चाचा की मौत के बाद कुछ दिन तो सब सामान्य रहा। फिर वह हर रोज मेरे सपने में आने लगे। मुझे कुछ समझ नहीं आया। मैं परेशान रहने लगा। फिर एक दिन सोशल मीडिया पर मैंने काशी के कई वीडियो देखे। इसमें मुझे अस्थि विसर्जन-पिंडदान की जानकारी मिली।
मैंने उसे यूट्यूब पर सर्च किया। इसके बाद मैं अमेरिका से फ्लाइट लेकर 2 अक्टूबर को इंडिया पहुंचा। इसके बाद काशी आया।

जैक्सन ने कहा- मैंने सोशल मीडिया पर काशी से जुड़े कई वीडियो देखे। फिर यहां आया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगा में प्रवाहित की अस्थियां
शनिवार को जैक्सन चाचा की अस्थियां लेकर वाराणसी पहुंचे। अस्सी घाट पर तीर्थ पुरोहित राहुल पांडेय के आचार्यत्व में अस्थि विसर्जन और पिंडदान का अनुष्ठान कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक प्रक्रिया पूरी की गई।
इसके बाद जैक्सन ने गंगा की धारा में चाचा की अस्थियां प्रवाहित कीं। इस दौरान वह भावुक हो गए। उन्होंने चाचा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और पिंडदान की प्रक्रिया में भी हिस्सा लिया।

अमेरिका से काशी आए जैक्सन ने अपने चाचा नेट की अस्थियां गंगा में विसर्जित कीं।
पुरोहित बोले- पिंडदान आत्मा की मोक्ष के लिए किया जाता है
तीर्थ पुरोहित राहुल पांडेय ने बताया कि सनातन परंपरा में काशी और गंगा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी में अस्थि विसर्जन और पिंडदान दिवंगत आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना से किया जाता है।
उन्होंने बताया कि पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए पिंडदान और तर्पण की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

