Breaking
Thu. Sep 17th, 2026

काशी में श्रद्धालुओं की 3 किमी लंबी लाइन:संतान प्राप्ति के लिए लोलार्क कुंड में स्नान, देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचे

वाराणसी : काशी में श्रद्धालुओं की 3 किमी लंबी लाइन लगी है। लोलार्क कुंड की आठों गलियां फुल हैं। लोलार्क षष्ठी का स्नान देर रात 12 बजे से शुरू हो गया है। कुंड में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं को महज 30 सेकंड का समय दिया जा रहा है। इसके अलावा कपड़े बदलने की व्यवस्था कुंड के बाहर की गई है। कुंड में स्नान के दौरान श्रद्धालु एक फल का भी दान करते हैं।

संतान प्राप्ति की कामना के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचे हैं। अधिकांश लोग उदया तिथि की मान्यता के अनुसार सूर्योदय के बाद कुंड में डुबकी लगाने पहुंचे। सबसे पहले 51 डमरूओं के वादन से आरती की गई और फिर धीरे-धीरे श्रद्धालुओं का जत्था स्नान करने के लिए पहुंचने लगा। एक दिन पहले से ही बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, बंगाल, नेपाल के अलावा काशी के आसपास के जिलों से लोग पहुंच चुके हैं।

लोलार्क कुंड एक खड़े कुएं से जुड़ा हुआ और उसमें उतरने के लिए तीन तरफ से सीढ़ियां हैं।

लोलार्क कुंड एक खड़े कुएं से जुड़ा हुआ और उसमें उतरने के लिए तीन तरफ से सीढ़ियां हैं।

रात 12 बजे 101 डमरू वादन के साथ लोलार्क कुंड का पूजन हुअए।

रात 12 बजे 101 डमरू वादन के साथ लोलार्क कुंड का पूजन हुअए।

डमरू वादन के बाद कुंड में स्नान शुरू हुआ। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई।

डमरू वादन के बाद कुंड में स्नान शुरू हुआ। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई।

स्नान से पहले बच्चों का मुंडन कराया गया।

स्नान से पहले बच्चों का मुंडन कराया गया।

कुंड में स्नान के दौरान सुरक्षा के लिए ड्रोन से भीड़ पर नजर रखी जा रही है।

कुंड में स्नान के दौरान सुरक्षा के लिए ड्रोन से भीड़ पर नजर रखी जा रही है।

लोलार्क कुंड से पांडेय हवेली तक डबल बैरिकेडिंग की गई

अत्याधुनिक ड्रोन से पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है। इस बार भदैनी स्थित लोलार्क कुंड से पांडेय हवेली तक डबल बैरिकेडिंग की गई है। मौसम को देखते हुए श्रद्धालुओं को धूप से राहत देने के लिए बैरिकेडिंग के ऊपर कपड़े की छांव की व्यवस्था की गई है।

कुंड के पास जिग-जैग बैरिकेडिंग की गई है। प्रवेश और निकासी के अलग-अलग द्वार बनाए गए हैं, ताकि भीड़ एक जगह न जुट पाए। लोलार्क षष्ठी पर लोलार्क कुंड में स्नान की प्राचीन धार्मिक परंपरा है। इसे सूर्य का कुंड माना जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल षष्ठी यानी लोलार्क षष्ठी के दिन सूर्यदेव के रथ का पहिया यहां गिरा था। इसी कारण इस स्थान का नाम लोलार्क पड़ा। मान्यता है कि इस दिन पति-पत्नी एक साथ लोलार्क कुंड में स्नान करें तो उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है।

पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बुधवार को स्नान से पहले व्यवस्था देखी। सुरक्षा इंतजामों को बनाए रखने के निर्देश दिए।

पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बुधवार को स्नान से पहले व्यवस्था देखी। सुरक्षा इंतजामों को बनाए रखने के निर्देश दिए।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *