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आकाश आनंद की राह में फिर रोड़ा बनीं मायावती, कहा- “कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं, अभी मैच्योर नहीं”

  • BSP में आकाश आनंद को मायावती ने एक बार फिर बड़ा सियासी झटका दिया है, उन्होंने साफ कहा कि आकाश आनंद अभी मैच्योर नहीं हुए हैं, उन्हें और परिपक्व होने की जरूरत है

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर आकाश आनंद को लेकर बड़ा सियासी संदेश दिया है। बसपा की ऑल इंडिया बैठक में मायावती ने साफ कर दिया कि आकाश आनंद को फिलहाल पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। आकाश आनंद अभी मैच्योर नहीं हुए हैं, उन्हें और परिपक्व होने की जरूरत है। मायावती ने स्पष्ट किया कि आकाश आनंद को पार्टी में काम करने की अनुमति है, लेकिन जब तक वह पर्याप्त रूप से परिपक्व नहीं होते, तब तक उन्हें बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

आकाश आनंद की भूमिका पर फिर उठे सवाल

मायावती के ताजा बयान के बाद BSP में आकाश आनंद की मौजूदा भूमिका और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पार्टी में आकाश को लेकर पहले भी कई बार बड़े फैसले हुए हैं, लेकिन अब मायावती ने यह संकेत दे दिया है कि फिलहाल उन्हें संगठन में शीर्ष स्तर की जिम्मेदारी मिलने की संभावना नहीं है।

हालांकि, मायावती ने यह भी साफ किया कि आकाश आनंद पार्टी में काम करते रहेंगे। यानी उन्हें पूरी तरह से राजनीतिक गतिविधियों से अलग नहीं किया गया है, लेकिन पार्टी की बड़ी जिम्मेदारियों से फिलहाल दूर रखा जाएगा।

अकेले चुनाव लड़ेगी BSP

ऑल इंडिया बैठक में मायावती ने पार्टी की चुनावी रणनीति को लेकर भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी देश में होने वाले सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले लड़ेगी। यानी आने वाले चुनावों में BSP किसी भी दल के साथ गठबंधन करने के बजाय अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरने की रणनीति अपनाएगी। मायावती ने कहा कि बहुजन समाज के हित और शोषित वर्ग को शासक वर्ग बनाने का मिशन उनके लिए सर्वोपरि है और इसके लिए सत्ता जरूरी है।

पंजाब चुनाव को लेकर ऐलान

इससे पहले, मायावती ने ऐलान किया था कि उनकी पार्टी पंजाब विधानसभा चुनाव बिना किसी गठबंधन के अकेले अपने बलबूते पर लड़ेगी। बसपा प्रमुख ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए कर्मठ और ईमानदार लोगों को उम्मीदवार बनाए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कथित जनविरोधी रवैये से परेशान जनता के सामने बसपा की ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ और आंबेडकरवादी नीतियों को विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

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